मऊ। सरकार की तरफ से बच्चों के कल्याण के लिए शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलता नजर नहीं आ रहा है।शिक्षा सत्र का चार माह बीत गया, लेकिन अभी तक जिले के परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों में नि:शुल्क ड्रेस का वितरण नहीं हो सका है। इससे बच्चों को बिना ड्रेस के ही स्कूल जाना पड़ रहा है। विभाग की तरफ से 28 सप्लायरों से सैंपल मांगा गया था। सैंपल टेस्ट में तीन सप्लायरों का सैंपल ही मानक पर खरा मिला है। जिले मेें 1060 प्राथमिक, 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 97 सहायता तथा 57 समाज कल्याण से संचालित विद्यालयों में लगभग 1.39 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। शासन की तरफ से परिषदीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष खड़ा करने के लिए तमाम कवायद विभागीय लापरवाही के चलते सफल नहीं हो रहीं। परिषदीय विद्यालयों में शत प्रतिशत नामांकन, ठहराव आदि के लिए नि:शुल्क ड्रेस सहित तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई है। नियम के तहत प्रति बच्चे को 600 रुपये की लागत से नि:शुल्क दो सेट यूनिफार्म दिया जाना है। शिक्षा सत्र का चार माह बीत गया, लेकिन अभी तक ड्रेस वितरित करना तो दूर प्रक्रिया तक पूरी नहीं की जा सकी है। अधिकारियों की मानें तो इस वर्ष शासन ने क्वालिटी के मानक में बदलाव किया है। नए नियम के तहत ड्रेस में काटन 33 प्रतिशत होना चाहिए। विभाग की तरफ से सप्लायरों से सैंपल मांग गया था। इसके लिए 28 सप्लायरों ने सैंपल भेजा। विभाग ने नगर के कंधेरी स्थित राजकीय पालीटेक्निक से सैंपलों की जांच कराई तो तीन सप्लायरों के ही सैंपल मानक खरे मिले। चालू माह में ड्रेस वितरण करने की प्रक्रिया चल रही है। पिपरीडीह क्षेत्र के अभिभावक संजीव कुमार यादव, प्रतिभा मौर्य, सरिता देवी, भीष्म कुमार का कहना है कि कई वर्ष से सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। नगर शिक्षा अधिकारी एके गौतम का कहना है कि शासन से ड्रेस के संबंध में नए मानक का आदेश देर से आने के चलते समस्या आई है। विद्यालय प्रबंध समितियों को क्रय करने के लिए आदेश दे दिया गया है। जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता अखिलेश सिंह ने बताया कि नि:शुल्क ड्रेस वितरण प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। शीघ्र ही ड्रेस वितरण शुरू कर दिया जाएगा।