कुसम्हा। ग्राम सभा विशुनपुरा में वर्षो पुरानी विजय दशमी के बाद होने वाली रामलीला का मंचन बुधवार की देर शाम से शुरू हो गया। रामलीला के पहले दिन कलाकारों ने नारद मोह मंचन किया। उद्घाटन ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मोहन दुबे ने किया। दस दिनों तक चलने वाली रामलीला पहले दिन नारद मोह का मंचन हुआ। जहां नारद मुनि घूमते हुए हिमगिरी पर्वत पर पहुंचते हैं, वहां का सुंदर वातावरण देख वह तप करने लगते हैं। इसी दौरान स्वर्ग के गुप्तचर भगवान इंद्र को इस बात की खबर देते हैं। जिस पर इंद्र नारद मुनि का तप भंग करने के लिए कामदेव को भेजते है। कामदेव उर्वशी, मेनका, रंभा आदि के जरिय तपस्या भंग करने की कोशिश करते है, लेकिन वह सफल नहीं होते। अपनी तपस्या से नारद मुनि को अभिमान हो जाता है। जिस पर ब्रह्मादेव यह बात भगवान शंकर को बताते हैं। जिस परन अपना वृतांत विष्णु भगवान को सुनाते हैं। भगवान विष्णु नारदजी का अहंकार तोड़ने के लिए लक्ष्मीजी को आदेश देते हैं कि एक नगर स्थापित करना है। नारदजी घूमते हुए वहां पहुंचते हैं और शादी की लालसा जागृत हो जाती है। नारद मुनि भगवान विष्णु से उनका रूप मांगते हैं। भगवान विष्णु उनको वानर का रूप दे देते हैं। इस रूप से गुस्सा होकर नारदजी उनको श्राप देते हैं कि जिस तरह भरी राजसभा मे महिलाओं के सम्मुख लज्जित हुआ हूं, उसी तरह आप भी पत्नी के वियोग में रोएंगे। इसी प्रसंग के साथ पहले दिन की लीला संपन्न हो जाती है। इस दौरान रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सुरेश पांडेय, नरेंद्र पांडेय, मंजेश, अनूप, बृजेश, गौरव मिश्रा आदि उपस्थित रहे।