मऊ। सरकार की पौधरोपण कार्यक्रम की मुहिम विभागीय अधिकारियों कि शिथिलता के चलते परवान नहीं चढ़ पा रही। नेशनल हाइवे, पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, शहर में सड़कों के चौड़ीकरण में हजारों पड़े पेड़ काट दिए गए। लेकिन एक साल गुजरने के बाद भी इनके स्थान पर पोधरोपण नहीं कराया गया। पिछले साल जनपद में चार लाख पौधे लगाए गए थे, उचित देखरेख के अभाव में 25 प्रतिशत पौधे सूख गए। इस साला 23 लाख 56 हजार पौधे लगाए जाएंगे। जनपद को हरा भरा करने के लिए पौधरोपण करने की कवायद तेज हो गई है। गत वर्ष विभिन्न मार्गो पर 9085 पौधे कटवा दिए गए, लेकिन अभी तक उन स्थानों पर पौधरोपण नहीं कराया जा सका है। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो लखनऊ बलिया मार्ग पर 5446, पूूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर 154, नेशनल हाइवे पर 3385 पेड़ कटवाए गए थे। लेकिन संबंधित विभाग की तरफ से पौधों का रोपण नहीं कराया जा सका है। हालत यह है कि एनएचआई, पीडब्ल्यूडी द्वारा वन विभाग को पौधरोपण कराने के लिए जमीन उपलब्ध ही नहीं कराई जा सकी है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इस साल रतनपुरा-भीमपुरा मार्ग, हलधरपुर बलिौझा मार्ग, मुहम्मदाबादगोहना-चिरैयाकोट सभी सड़कों पर कटे पेड़ों के स्थान पर पौधरोपण कराया जाएगा। 23 लाख 56 हजार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 2018-19 में जिले में चार लाख पौधे लगाए गए थे। उचित देखरेख के अभाव में 25 प्रतिशत पौधे सूख गए। बढुआगोदाम / पिपरीडीह : क्षेत्र के पनियरा, कहिनौर, पिपरीडीह, उस्मानपुर, बढुआगोदाम, रैकवारडीह सहित विभिन्न स्थानों पर पिछले साल पौधरोपण कराया गया था। लेकिन उचित देखरेख के अभाव में 50 प्रतिशत पौधे सूख गए। इस वर्ष प्रमुख मार्गो पर विभाग की तरफ से गड्ढे खोदे गए हैं, लेकिन बरसात के चलते अधिकांश गड्ढे पट गए हैं। पौधे एक हफ्ते से गिराए गए हैं लेकिन अभी तक इन्हें रोपा नहीं गया है। क्षेत्र के रविंद्र यादव, शिवकुमार वर्मा, सुरेश प्रसाद, जर्नादन प्रसाद का कहना है कि पौधरोपण कराए जाने के बाद देखरेख सही ढंग से नहीं हो पाती है। इसके लिए ठोस कार्ययोजना बनाए जाने के साथ पौधरोपण कराने वाले विभाग को जवाबदेह बनाया जाए। संजय विश्वाल, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी ने बताया कि शहर के मुख्य मार्ग, नेशनल हाइवे पर पौधे लगाए जाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। गड्ढे खोद दिए गए हैं। पौधे भेजवाए जा रहे हैं। पौधरोपण के बाद निगरानी का काम संबंधित विभाग को करना होगा। जीओ टैगिंग कराया जाएगा।