घोसी नगर के बड़ागांव में मोहर्रम की चाद रात्रिमें नौहाख्वानी करते अंजुमन के लोग।
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घोसी। बड़ागांव शिया मोहल्ले में शनिवार की रात मोहर्रम के चांद की पुष्टि होते ही शिया समुदाय शोक में डूब गया। सभी लोगों की आंखें इमाम हुसैन के ग़म में नम हो गयीं। चारों तरफ या हुसैन या हुसैन की सदा बुलन्द होने लगी। समुदाय के लोगों ने गम के लिबास काले कपड़े पहन लिए तो महिलाओं ने शृंगार के समान अपने शरीरों से उतार दिए। घरों पर स्याह परचम लहराने लगा। इमाम बारगाहों में मजलिसे हुईं जिसमें शहीदाने कर्बला का जिक्र होता रहा। अजादारों ने नौहा मातम कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की। सदर इमाम बारगाह पर अंजुमन सज्जादिया के नौहाख्वा शमीम हैदर ने दर्द भरे नौहे ‘देख कर चाँद मोहर्रम का ये गूंजी है सदा, या हुसैन या हुसैन या हुसैन’ जिसे सुनकर अजादार रोने लगेे। नीमतले इमाम चौक पर नजरे इमाम हुसैन हुई। इसके बाद हाजी ग़जनफर अब्बास और साजिद हुसैन के नौहे ‘फलक पे चाँद मोहर्रम का जब नजर आया, सफ़र में याद मुसाफिर को अपना घर आया’ ने लोगों को मगजदा कर दिया। उस के बाद अजाखाने अबुतालिब और रौजा ए मौला अली पर भी नौहाख्वानी हुई। पूरे गांव में मजलिसों का दौर शुरू हो गया। नौहा व मातम कर शहजादी बिन्ते रसूल इमाम हुसैन की माँ को उनके लाल का पुरसा दिया गया। इस अवसर पर शहीद हुसैन, ताहिर हुसैन, असग़र अली नासरी, गुलाम हैदर,मोहम्मद अली नासरी, तफहीम हैदर, अहमद औन, लुकमान हैदर, जौहर अली, नफीस असग़र, मजहर हुसैन, तनवीर अब्बास, बाकर रजा, अजहर हुसैन, अली नक़ी, मोहम्मद अब्बास, मोहम्मद हाशिम, हसन अब्बास, शमशीर अब्बास, जहीर अब्बास, मोहम्मद अली, शाजान अब्बास, अली अब्बास आदि भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।