मऊ। बदलते जीवनशैली और खान-पान की वजह से हृदयरोग से संबंधित बीमारियां काफी आम हो गई हैं। जीवन की आपाधापी के बीच सेहत और दिल को दुरुस्त रखना चुनौती बन रहा है। इनसे बचने के लिए खुद को तैयार करना होगा। लोगों को दिल की बीमारियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से प्रतिवर्ष 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। जिससे लोग हृदय रोग की बीमारियों से सजग रहें भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति तनावग्रस्त है। यही कारण है कि वृद्धावस्था में होने वाली दिल की बीमारी अब छोटी उम्र के लोगों को भी निशाना बना रही है। चिकित्सकों की मानें तो जनपद में 25 से 30 प्रतिशत लोग हृदय रोग संबंधित बीमारियों से ग्रसित हैं। महिलाओं में भी यह रोग तेजी से बढ़ रहा है। दिल का सबसे बड़ा दुश्मन तनाव है। इसका बड़ा कारण जीवनशैली है। इसके अलावा बिगड़ी दिनचर्या, गलत खानपान, प्रदूषण के चलते दिल से जुड़ी बीमारियां काफी बढ़ रही हैं। अब कम उम्र में भी इस बीमारी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में नगर के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एसएन खत्री का कहना है कि दिल को दुरुस्त रखने के लिए सही खानपान, एक्सरसाइज और तनाव को दूर भगाना सबसे जरूरी है। तनाव के कारण मस्तिष्क से जो रसायन स्रावित होता हैं वे हृदय की पूरी प्रणाली खराब कर देते हैं। हृदय हमारे शरीर का ऐसा अंग है जो लगातार पंप करता है और पूरे शरीर में रक्त प्रवाह को संचालित करता है। हृदय संचार प्रणाली के मध्य में होता है और धमनियों और नसों जैसी रक्त वाहिनियां अशुद्ध रक्त को शरीर के हर भाग से हृदय तक ले जाती हैं और शुद्ध रक्त को हृदय से शरीर के हर भाग तक पहुंचाती हैं। हृदय की बीमारी का इलाज बचाव है। बचाव का सबसे सरल तरीका लाइफ स्टाइल में सही बदलाव है। एक जगह लगातार छह घंटे तक बैठना हृदय रोग का कारण बन सकता है।