कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद स्तरीय कृषक जागरूकता गोष्ठी को संबोधित करते डीएम ज्ञान प्रकाश त्रिप?
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फसल अवशेष प्रबंध का हर्बल खेती,आर्गेनिक खेती के लिए जनपद स्तरीय कृषक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई।जिलाधिकारी ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि प्राचीन काल में मानव स्वास्थ्य के अनुकुल तथा प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खेती की जाती थी, जिससे जैविक और अजैविक पदार्थें के बीच आदान-प्रदान का चक्र निरंतर चलता रहा था, जिसके फलस्वरूप जल, भूमि, वायु तथा वातावरण प्रदूषित नहीं होता था। हरित क्रांति के समय से बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए एवं आय की दृष्टि से उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है। कृषि विभाग ने इस विशेष प्रकार की खेती को अपनाने के लिए, बढावा दिया जिसे हम जैविक खेती के नाम से जानते है। भारत सरकार भी इस खेती को अपनाने के लिए प्रचार-प्रसार कर रही है। उप कृषि निदेशक एसपी श्रीवास्तव ने कहा कि जैविक खेती में रसायानों का अधिक प्रयोग करने बहुत सारे नुकसान होते हैं इसलिए वैज्ञानिक खेती के साथ-साथ पुरानी परंपरागत खेती का उपयोग करना चाहिए। अगर आप कार्बनिक खेती का उपयोग करते है तो पशुपालन भी अवश्य करें। पशुपालन शुद्ध दुध के साथ-साथ आमदनी का भी एक अहम इकाई है। पशुओ को हरा चारा खिलाने से अधिक दूध उत्पादन होता है अगर पशुओ को हरा चारा नही देते है तो उस पशु की दुध उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। जिला उद्यान अधिकारी द्वारा सब्जी उत्पादन, केले की खेती, अमरूद की खेती से होने वाले लाभ पर विस्तार से प्रकाश डाला।इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार, आयुर्वेद रंगबहादुर सिंह, कृषि बैज्ञानिक बीके सिंह, प्रभुनारायण सिंह, अरविंद कुमार सिंह, विरेंद्र विद्यार्थी आदि शामिल रहे।