फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्मचारी मेडिकल पर, एनसीडी क्लीनिक बंद

विज्ञापन
जिला अस्पताल में खाली पड़ा एनसीडी क्लीनिक, परेशान मरीज। - फोटो : MAU
विज्ञापन
मऊ। शासन द्वारा लाख प्रयास के बाद भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज रामभरोसे ही हो रहा है। जिला अस्पताल में मंगलवार को लापरवाही का एक ओर मामला प्रकाश में आया है। जहां नॉन कम्युनिकेबल डिसीज अर्थात असंचारी रोगों के इलाज के लिए एनसीडी क्लीनिक बीते दो दिनों से बंद है। दरअसल कर्मचारी एक साथ मेडिकल अवकाश पर हैं, जबकि एक मात्र चिकित्सक इमरजेंसी ड्यूटी के चलते नहीं बैठ रहे हैं। ऐसे में इलाज कराने के लिए आ रहे मरीज बिना जांच कराए ही बैरंग लौट रहे हैं। चौंकाने वाली बात है कि सीएमएस ने सभी को एक साथ मेडिकल लीव दे दिया लेकिन सीएमओ और नोडल अधिकारी को जानकारी तक नहीं है। सीएमओ और नोडल अधिकारी एनसीडी ने इस संबंध में जानकारी लेने की बात कही।
विज्ञापन

शासन स्तर से राष्ट्रीय असंचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल सहित जिले के कोपागंज, परदहा, दोहरीघाट, घोसी, मुहम्मदाबाद गोहना सीएचसी में एनसीडी क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। इसमें चिकित्सक सहित लैब टेक्नीशियन, फिजियोथिरेपिस्ट, काउंसलर तथा स्टाफ नर्स तैनात हैं लेकिन बीते दो दिनों से जिला अस्पताल में संचालित एनसीडी क्लीनिक बंद है। दरअसल इसमें तैनात चिकित्सक की इमरजेंसी ड्यूटी के चलते वो क्लीनिक में नहीं बैठ रहे हैं। वहीं तैनात एक स्टॉफ नर्स मेटरनिटी लीव पर तो दूसरी मेडिकल लीव, वहीं फिजियोथेरेपिस्ट भी 31 दिसंबर तो काउंसलर और लैब टेक्नीशियन मेडिकल लीव पर हैं। जबकि एनसीडी क्लीनिक में रोजाना 50 से 60 मरीज शुगर, ब्लडप्रेशर, हाइपरटेंशन आदि गैर संचारी बीमारियों की जांच कराने आते हैं। इसके अलावा ओपीडी में तैनात चिकित्सकों द्वारा 20 से 30 मरीज जांच के लिए भेजे जाते हैं। बीते दो दिनों से क्लीनिक बंद होने के चलते मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज बाहर से जांच कराकर उपचार कराने को बाध्य हैं। एनसीडी क्लीनिक के नोडल अधिकारी तथा अपर सीएमओ डॉ. पीके राय का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस संबंध में जानकारी लेने की बात कही।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें