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टीबी : जागरूकता का अभाव अभियान में बाधा

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नगर के शाही कटरा के मैदान में मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण अभियान के शुभारंभ पर बच्चे को दवा पिलाते जिल - फोटो : MAU
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मऊ। स्वास्थ्य विभाग टीबी मुक्त अभियान को लेकर प्रयासरत है। लेकिन जागरूकता का अभाव इसमें बाधा बन रहा। जिला क्षय कार्यालय एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस) श्रेणी के टीबी के मरीजों पर प्रति माह लाखों रुपये की राशि खर्च कर रहा। हर मरीज पर के उपचार पर करीब 20 हजार रुपये की राशि खर्च हो रही। लेकिन जागरूकता नहीं होने से मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे। ऐसे में अधिकतर मरीज प्राइवेट अस्पताल पहुंच जा रहे। ऐसे में विभाग निजी चिकित्सकों से संपर्क कर टीबी मरीजों को टीबी क्लीनिक भेजने की अपील कर रहा। जिससे जागरूकता तथा आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद टीबी का इलाज नि:शुल्क किया जा सके। बताते चले कि केंद्र सरकार द्वारा टीबी मुक्त बनाने के लिए पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम को बदलकर राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम कर दिया गया है।साथ ही बीते साल से एक्सडीआर (एक्सटेसिंव ड्रग रेसिस्टेंस) मरीजों को इलाज के लिए बेडाक्यूलिन दवा नि:शुल्क मुहैैया कराने की योजना शुरू की गई हैं। एक्सडीआर मरीजों के नौ माह तक चलने वाली यह दवा करीब 12 लाख रुपये की होती हैं, जिसे सरकार द्वारा इन मरीजों को नि:शुल्क मुहैया कराया जाता हैं। वर्तमान में जिले में आठ एक्सडीआर मरीजों का इसका लाभ विभाग द्वारा दिया जा रहा हैं। इसके अलावा वर्तमान में एमडीआर (मल्ट्री ड्रग रेसिस्टेंस) से पीड़ित 269 मरीजों के इलाज पर प्रतिदिन 300 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक खर्च किया जा रहा हैं। जबकि प्रथम सामान्य टीबी मरीजों को नि:शुल्क दवाईया मुहैया कराने के साथ पोषण के लिए 500 रुपये की राशि उनके खाते में डाली जा रही हैं। टीबी क्लीनिक के आंकड़ों के अनुसार 2019 में जिले में 3690 मरीज सामने आए हैं।
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