मऊ। आयुष्मान योजना को संचालित हुए एक साल का समय बीत चुका हैं, बावजूद जिले में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को इसका लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। आयुष्मान कार्ड होने पर भी मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों के खिलाफ 35 शिकायते मिली है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर नतीजा सिफर है। हालांकि एक मरीज ने तो एक निजी अस्पताल के मनमाने रवैये के खिलाफ मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत भी की है। महकमा सक्रिय भी हुआ लेकिन अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई मात्र दिखावे तक ही सिमटी रही। आयुष्मान योजना के तहत जिले में 11 अस्पताल पंजीकृत हैं। ऐसा पहीं है कि योजना के तहत जिले में बेहतर निजी अस्पताल नहीं जुड़े है। बल्कि योजना के तहत जुड़े छह निजी अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सकों और बेहतर संसाधन वाले माने जाते है। इनमें दो अस्पताल जिले का सर्वोत्तम सुविधा वाला अस्पताल है। लेकिन इन अस्पतालों द्वारा आयुष्मान योजना के मरीजों का उपचार करने में हीलाहवाली की जा रही है। ऐसा नहीं है कि इन अस्पताल प्रबंधन की मनमाने रवैया के चलते मरीजों को हो रही परेशानियों से जिले के जिम्मेदारों को भनक नहीं है। सूत्रों की माने तो प्रतिदिन पांच से छह शिकायत इन जिम्मेदारों के पास पहुंच रही है। आयुष्मान योजना पर नजर रखने वाली तीन सदस्यीय जिला क्रियान्वयन समिति के आंकड़े पर नजर डाले तो अब तक 35 से ज्यादा शिकायते आई है। जिसमें मरीजों के भर्ती करने में लापरवाही, भर्ती करने के बाद इलाज में लापरवाही करना है। चौकाने वाली बात यह है कि यह शिकायते उन्हीं दो सर्वोत्तम अस्पताल के खिलाफ सबसे ज्यादा है, जिनके यहां सबसे ज्यादा विशेषज्ञ चिकित्सक और आधुनिक संसाधन उपलब्ध है। विश्वसनीय सूत्रों की माने तो योजना में शामिल एक बड़े निजी अस्पताल ने बलिया के एक व्यक्ति को इलाज के लिए एक माह पूर्व भर्ती किया था। उस समय मरीज के बाद पास गोल्डन कार्ड नहीं होने के चलते अस्पताल प्रबंधन ने सामान्य मरीज की प्रक्रिया के तहत इलाज शुरू किया। लेकिन दो दिन बाद मरीज के परिजनों ने गोल्डन कार्ड की बात कहकर नि:शुल्क इलाज की बात कही, लेकिन शुरू में गोल्डनकार्ड नहीं दिखा पाने का हवाला देते हुए अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिजनों को 42 हजार रुपये का बिल थमा दिया। वहीं, इस दौरान मरीज की मौत भी हो गई। इसके बाद मृतक के बेटे ने इसकी शिकायत जिले के अधिकारियों से भी की, लेकिन कोई कार्रवाई ना होने पर उसके द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई। ऊपर से दवाब पड़ने के बाद जिले के अधिकारियों ने जब अस्पताल प्रबंधन पर दवाब डाला तो अस्पताल प्रबंधन ने ली गई राशि वापस कर दी। सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह ने बताया कि पंजीकृत अस्पताल द्वारा योजना में शामिल मरीजों को भर्ती करने में लापरवाही बरतने पर गठित टीम को भेजकर मामले की जांच कर मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है।