सूरजपुर। क्षेत्र के रसूलपुर आश्रम में चौथे दिन घाघरा के उग्र रुख से तटवर्ती इलाके के लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही। प्रतिदिन उपजाऊ भूमि नदी मेें विलीन हो रही है। सिंचाई विभाग द्वारा पेड़ों की डालियां डाली जा रही है, लेकिन कटान की तीव्रता जस की तस है। नदी बस्ती की तरफ कटान करते बढ़ रही है। ऐसे में तटवर्ती इलाकों के लोग दशहत में हैं। मधुबन तहसील क्षेत्र के रसूलपुर आश्रम पर चौथे दिन घाघरा के प्रलयंकारी रुप धारण करने से तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें तेज हो गई है। नदी का रुख रसूलपुर आश्रम पर सीधा उत्तर से दक्षिण की दिशा के तरफ लगभग 20 मीटर नीचे से गहराई करते हुए कटान कर रही है। अब तक 10 बीघा से अधिक कृषि योग्य भूमि नदी मेें विलीन हो चुकी है। आबादी की जमीन लगभग 50से 60 फीट चौडाई कटान करती हुई सीधे शिवनाथ यादव, नरसिंह यादव मान सिंह सुबाष यादव सहित आश्रम बस्ती की तरफ बढ़ रही है। बैकरोलिंग होने से ऐतिहासिक धरोहरों सहित रसूलपुर आश्रम का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता योगेंद्र यादव, अवर अभियंता प्रदीप कुमार अपने दल बल के साथ व ग्रामीणों के सहयोग से पेड़ों की डालियों को डाला जा रहा है लेकिन कटान की तीव्रता कम नहीं हो पाई थी। कटान पीड़ितों का कहना था कि लगातार चार दिनों से कटान हो रही है, लेकिन कटान रोकने में खानापूर्ति की जा रही है। यदि विभाग ने जल्द ही इसका समाधान नहीं निकाला तो लोग आंदोलन को उतर पड़ेंगे।