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तटवर्ती इलाकों में फैला घाघरा का पानी

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दोहरीघाट में उफनाई घाघरा नदी। - फोटो : MAU
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दोहरीघाट/ दुबारी। घाघरा नदी में शुक्रवार को जलस्तर तो स्थिर रहा। लेकिन बाढ़ का पानी घोसी और मधुबन तहसील क्षेत्र के तटवर्ती इलाकों में फैल गया है। देवरांचल के 30 पुरवों के संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। यहां के लोग निजी नावों का इस्तेमाल कर रहे। कारण, प्रशासन ने यहां अभी तक आवागमन के लिए नावों का बंदोबस्त नहीं किया है। ऐसे में जहंा बच्चे स्कूल आने में कठिनाई महसूस कर रहे वहीं मवेशियों के लिए भी चारे पानी का संकट पैदा हो गया है। बीते चौबीस घंटे में घाघरा का जलस्तर स्थिर होने से दोहरीघाट कसबे के आस पास के क्षेत्रों में हालांकि फौरी तौर पर संकट टल गया लगता है। लेकिन तटवर्ती इलाके के गांवों में नदी का पानी फैल गया है। जलस्तर में मामूली कमी दर्ज की गई है। गौरीशंकर घाट पर शुक्रवार को जलस्तर 69.85 मीटर था। जानकारों की मानें तो खतरा अभी टला नही है क्योंकि नदी कभी भी रौद्ररूप धारण कर सकती है। उधर, परसिया जयराम गिरि हाहा नाला पर नदी का जलस्तर शुक्रवार को 65.36 मीटर दर्ज किया गया। क्षेत्र के 30 पुरवों के संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। घाघरा नदी के पानी से परसिया से देवारा, भटोली से देवारा, बरोहा से देवारा, मिश्रौली से देवारा, चौहान पुर से देवार, भगत के पुरा से देवारा, खैरा से देवारा, हरिलाल के पुरा से देवारा, नयी बस्ती देवारा, बिंटोलिया से देवारा तक के संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। इन गांवों के ग्रामीणों ने नाव सुलभ कराने की मांग की है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी में वृद्धि नहीं हुई तो संपर्क मार्गों पर आवागमन सुचारू होने में सप्ताहभर का समय लग जाएगा। क्षेत्रवासियों की शिकायत है कि प्रशासन ने एक भी नाव मुहैया नहीं कराई है। वह अपने संसाधनों से नाव की व्यवस्था किए हुए हैं। जबकि देवरांचल के किसान धान, अरहर, गन्ना और परवल की खेती को लेकर चिंतित हैं। उपजिलाधिकारी लालबाबू दुबे ने बताया कि अभी बाढ़ को लेकर चिंताजनक स्थिति नहीं है। अगर ऐसी स्थिति बनती है तो नावें सुलभ कराई जाएंगी।
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