कोपागंज। 11वीं मोहर्रम सदर इमामबाड़ा मोहल्ला फुलेल पूरा में बुधवार की देर रात मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस का आगाज अंजुमन इमामिया की मर्सियाखानी से हुई। उसके बाद इमाम-ए जुमा व जमाअत मौलाना हसन रजा साहब ने ख़िताब किया। कहा कि आज का दिन बहुत ही ग़म का दिन है, जब 10 मोहर्रम को इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों को शहीद कर दिया गया। उनके खेमों में आग लगा दी गई। सारे सामान लूट लिए गए। यहीं पर यजीदी फ़ौज का जुल्म रुकता नहीं है बल्कि अगली सुबह यानि 11 मोहर्रम को इमाम हुसैन के घराने की औरतों और बच्चों को कैद कर लिया जाता है। तक़रीर के बाद अंजुमन इमामिया, अंजुमन हैदरी, अंजुमन इमामिया कदीम, अंजुमन सज्जादिया ने आके परदेस में हर तरह लुटी हैं जैनब, दुश्मने दीं की जफ़ाओं में घिरी हैं जैनब ... नौहा पेश किया। नौहा सुन कर अजादार रोने लगे। इस मौके पर मौलाना हसन रजा , मौलाना जहूर मुस्तफा , मौलाना मोहम्तमद तकी, मौलाना असद अली, मौलाना गौहर अली, मौलाना मुंतजीर मेहंदी, मौलाना सेठ अंबर हुसैन , असद रजा, हसनैन, जफरुल नकी, शमशुल हसन, अकबर अली आदि शामिल रहे। घोसी : शिया बहुल इलाके में अजाखाना जाफरी में मजलिस का आयोजन किया गया। जिसमें उलेमा ने कर्बला के शहीदों का जिक्र किया तो वहीं अजादारों ने नौहा मातम कर शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मोजाहिर हुसैन ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद 12 मोहर्रम को अहले हरम का क़ाफ़िला इमाम सज्जाद जैनुल आबेदीन की सरपरस्ती में करबला से कूफ़ा की ओर चला, कूफ़ा की मंजिलों को तय करने के बाद इस क़ाफ़िले को यजीद के दरबार शाम (सीरिया) की ओर ले जाया गया। यजीद ने पहले दरबार में शहीदों के कटे हुए सरों को मंगवाया और फिर उबैदुल्लाह इब्ने जियाद के भेजे गए सिपाही ने यजीद के दरबार में तक़रीर कर दरबारियों को बताया कि करबला वालों को कैसे शहीद किया गया, यह सब देख कर कुछ लोगों ने उसी दरबार में खड़े हो कर यजीद की कड़ी आलोचना की। इस अवसर पर सैयद सिब्ते असगर, सैयद फ़राज अब्बास, सैयद असगर इमाम, मौलाना नसीमुल हसन, शमीमुल हसन, शमशाद अली, मोलवी फ़िरोज हैदर, नेसार अली, क़ायम रजा, इक़बाल अहमद, मोहम्मद मोहसिन, फ़ैज शब्बीर, खादिम हुसैन,,मोहम्मद अली, वाजिदअली, मोहम्मद हैदर एव भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।