लखनऊ में अधिवक्ता की हत्या के विरोध में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के
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मऊ। लखनऊ के अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी की निर्मम हत्या की घटना से आक्रोशित अधिवक्ताओं ने बृहस्पतिवार को बैठक कर घटना की निंदा की। साथ ही हत्यारों की गिरफ्तारी तथा मृत अधिवक्ता के परिजनों की सुरक्षा और एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की। बैठक के बाद अधिवक्ताओं ने घटना के विरोध में पूरे दिन न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन की बैठक बृहस्पतिवार को संघ के पुस्तकालय भवन में हुई। इसमें लखनऊ के अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी की हत्या की घटना की निंदा की गई। साथ ही हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई। इस दौरान अध्यक्ष शमसुल हसन और महामंत्री दरोगा सिंह ने प्रदेश सरकार से अधिवक्ताओं की हो रही लगातार हत्याओं पर अंकुश लगाने के लिए अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की गई। साथ ही हत्या के आरोपियों की 48 घंटे के अंदर गिरफ्तारी की मांग की गई। मृत अधिवक्ता के परिजनों को सुरक्षा के साथ ही एक करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग की गई। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर घटना के विरोध में पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहे। बैठक में अमरनाथ सिंह, पूर्व महामंत्री सूर्यनाथ यादव, राजेंद्र राय, लालजी पांडेय, फतेहबहादुर सिंह, अरविंद तिवारी, शिव प्रसाद श्रीवास्तव, हरिद्वार राय, राकेश मिश्रा, देवेंद्र प्रताप सिंह, अजय कुमार सिंह, लक्ष्मीकांत यादव, मनोज पांडेय, रामबदन, तनवीर अहमद, योगेन्द्र सिंह, पीएन सिंह आदि अधिवक्ता शामिल रहे। उधर डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन की बैठक अध्यक्ष जवाहर लाल प्रजापति की अध्यक्षता में हुई। इसमें अधिवक्ताओं ने घटना की निंदा करते हुए दो मिनट का मौन रखकर आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस मौके पर प्रस्ताव पास कर घटना के विरोध में पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहे। संचालन मंत्री विद्यानिधि उपाध्याय ने किया। तहसील सदर के अधिवक्ताओं ने भी बैठक कर घटना की निंदा की तथा प्रस्ताव पास कर पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहे। अध्यक्षता हसन अली और संचालन मंत्री तेजबहादुर सिंह ने किया।