मऊ। नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए चल रही तैयारियां रविवार को पूरी हो गई। प्रमुख बाजारों में पूजन सामग्री और सजावटी सामानों की खरीदारी से चहल-पहल बढ़ गई है। सर्राफा की दुकानों पर लोग चांदी की भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा, चांदी की बांसुरी की खरीदारी करते दिखे।
सर्राफा की दुकानों पर श्रद्धालु चांदी की भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा, बांसुरी की खरीदारी करते दिखे। भगवान श्रीकृष्ण की चांदी की प्रतिमा दो हजार रुपये से पांच हजार रुपये तक बिक रही थी। जबकि चांदी की बांसुरी 500 रुपये से दो हजार रुपये तक बिक रही थी। जबकि पूजा सामग्री सहित विभिन्न सामानों की खरीदारी किए जाने से बाजारों में चहल पहल रही। इस संबंध में नगर के घास बाजार स्थित सर्राफा व्यवसायी विजय सर्राफ का कहना था कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर चांदी की भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा, चांदी की बांसुरी कुछ ही पीस बिकती है।
नगर के सिंधी कालोनी, ब्रह्मस्थान, निजामुद्दीनपुरा, सहादतपुरा, मुंशीपुरा, चौक, मिर्जाहादीपुरा, गोला बाजार, रोडवेज, मधुबन, मुहम्मदाबादगोहना, घोसी, दोहरीघाट, कोपागंज, चिरैयाकोट, मुहम्मदाबादगोहना सहित विभिन्न तहसील क्षेत्रों के घरों में झांकी सजाने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही नगर के शीतला माता धाम, वनदेवी धाम, पावरहाउस स्थित श्रीराम जानकी मंदिर, कैलाशपुरी मंदिर, मठिया टोला शिवाला, औरंगाबाद, हनुमानघाट, ढेकुलियाघाट, ताजोपुर स्थित सिंधी बाबा की कुटी, वनदेवी धाम सहित विभिन्न मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजाकर पूजन अर्चन होगा। पूजा पंडालों में स्थापित होने वाली भगवान कृष्ण की प्रतिमाएं नगर के भीटी अंधा मोड़ सहित विभिन्न स्थानों पर बनाई जा रही थी। मूर्तिकार प्रतिमाओं को फाइनल टच देने में लगे रहे।
जन्माष्टमी पर बन रहे दुर्लभ संयोग
मुहम्मदाबादगोहना कस्बा निवासी पं.विरेंद्र शुक्ल ने बताया कि अष्टमी सोमवार को सुबह 8.20 बजे लग जाएगी, जो मंगलवार को सुबह 6.35 तक रहेगी। रात नौ बजे से रोहिणी नक्षत्र लग जाएगा। ऐसे में सोमवार को रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे। ऐसा ही संयोग भगवान कृष्ण के जन्म के समय भी बना था। इस वक्त रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा का वृषभ राशि में होना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। अगर जन्माष्टमी सोमवार या बुधवार को पड़ जाए तो यह किसी दुर्लभ संयोग की तरह होता है। इन दोनों दिन जन्माष्टमी पड़ने से जयंती योग बनता है जो बेहद शुभ माना जाता है। बताया जाता है कि बुधवार के दिन ही भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इससे छह दिन बाद सोमवार को भगवान कृष्ण का नामकरण हुआ था। बताया कि शुभ योग में व्रत रखने और पूजन अर्चन करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।