घोसी। क्षेत्र के बीबीपुर गांव निवासी और पाकिस्तान की सेना से लड़ते हुए तीन जुलाई 1948 में शहीद हुए ब्रिगेडियर मुहम्मद उस्मान की पैतृक हवेली प्रशासन की उदासीनता के चलते खंडहर में तब्दील हो गई है। यही नहीं, उनके नाम पर जिले में कोई स्मारक भी नहीं बनाया गया। नौशेरा के शेर के नाम से मशहूर देश के लिए पाकिस्तान की सेना से लड़ते हुए शहीद हुए ब्रिगेडियर मुहम्मद उस्मान का जन्म 15 जुलाई 1912 को बीबीपुर गांव में हुआ था। इनका परिवार क्षेत्र के मानिंद लोगों में शुमार था। देश सेवा के लिए उस्मान ने शादी नहीं की थी। इनके छोटे भाई स्व. मुहम्मद गुफरान भी ब्रिगेडियर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका परिवार वर्तमान में कनाडा में रहता है। देश की आजादी के 75 वर्ष बीतने के बाद भी बीबीपुर स्थित शहीद की पैतृक हवेली खंडहर में तब्दील हो गई है। यही नहीं उनके नाम पर कोई स्मारक भी नहीं बनाया गया। जबकि जनपद में कई शहीदों के नाम पर स्मारक बनाए गए हैं। ब्रिगेडियर मुहम्मद उस्मान गुलाम भारत के समय रॉयल मिलिटरी एकेडमी में प्रवेश लेने में सफल रहे। उन्हें केमिरोयनज पर 19 मार्च 1935 में नियुक्त किया गया था। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय उन्होंने कई मुस्लिम अधिकारियों के साथ पाकिस्तानी सेना में जाने से इंकार कर दिया था और भारत की सैन्य सेना में अपनी सेवा जारी रखी। जम्मू कश्मीर के नौसेरा में पाकिस्तानी सेना से लड़ते हुए तीन जुलाई 1948 को वह शहीद हो गए थे। मरणोपरांत उन्हें भारत सरकार ने महावीर चक्र से सम्मानित किया था।ब्रिगेडियर मुहम्मद उस्मान ने 10वीं बलूच रेजीमेंट, 50वीं एवं 77वीं पैरा ब्रिगेड का नेतृत्व किया था। उपेक्षा के कारण उनका पैतृक घर खंडहर में तब्दील हो चुका है। उनकी स्मृति में स्मारक तक नहीं बन सका है। इनकी कब्र नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के परिसर में संरक्षित है।