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मिश्रित मछली पालन से अधिक लाभ कमाएं

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मऊ। कृषि विज्ञान केंद्र, पिलखी के सभागार में चल रहा पांच दिवसीय मत्स्य उत्पादन एवं प्रबंधन प्रशिक्षण मंगलवार को संपन्न हो गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों से मिश्रित मछली पालन से अधिक लाभ कमाने की बात कही। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एलसी वर्मा ने किसानों को मछली पालन से अधिक लाभ कमाने के लिए मिश्रित मछली पालन करने का सुझाव दिया। कहा कि इससे किसान एक ही तालाब में एक से अधिक प्रजातियों की मछलियों का पालन कर प्रति हेक्टेयर अधिक लाभ कमा सकते हैं। केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानदीप गुप्ता ने किसानों को मानव भोजन में मछली की उपयोगिता, मत्स्य पालन के लिए तालाब का चुनाव, पुराने तालाब की देखरेख एवं मरम्मत, मत्स्य तालाब में प्रयोग होने वाले विभिन्न जैविक एवं रासायनिक उर्वरक केंद्र के तालाब पर मत्स्य भोजन संबंधी जानकारी देते हुए कहा कि मत्स्यपालन शुरू करते ही सबसे पहले पुराने तालाब की साफ-सफाई उनमें जो भी जलीय पौधे और जलीय कीड़े है, उनको हटाना आवश्यक है। जलीय पौधों की सफाई और जलीय कीड़ों का उन्मूलन बार-बार जाल चलाकर और 75 लीटर डीजल का छिड़काव कर किया जा सकता है। मृदा वैज्ञानिक चंदन सिंह ने मत्स्य तालाब के निर्माण के लिए भूमि के चयन तथा मृदा एवं जल परीक्षण के बारे में बताया। प्रशिक्षण में मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. अंगद प्रसाद, उद्यान वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र कुशवाहा, बीज प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक डॉ. हिमांशु राय और फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. लाल पंकज सिंह ने किसानों को अन्य जानकारियां दी। मत्स्य उत्पादन एवं प्रबंधन विषय पर विशाल कुमार, मोहन प्रसाद, श्रवण कुमार, रामकिशोर, अमृत, छोटेलाल, चंदन आदि शामिल रहे।
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