फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुकानों पर ताला, ऑनलाइन कंपनियां काट रहीं चांदी

विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में लागू कोरोना कर्फ्यू के चलते नगर सहित जिले के विभिन्न बाजारों की दुकानों में ताला लटका पड़ा है। इसके चलते लोगों का कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ा है। कारोबारियों के अनुसार लॉकडाउन से लगभग 90 करोड़ का नुकसान हो चुका है। ऐसे में ऑनलाइन कारोबार का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। कोरोना संक्रमण के चलते ग्राहक भी दुकानों पर जाने के बजाय होम डिलीवरी को प्राथमिकता देने लगे हैं। इससे आनलाइन कंपनियों की खूब चांदी कट रही है।
विज्ञापन

बाजारों की दुकानों पर ताला लटक रहा है। जिसके कारण छोटे बड़े कारोबार पर विपरीत असर पड़ा है। इससे दुकानदारों, कारोबारियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। कारोबारियों के अनुसार अब तक लगभग 90 करोड़ का नुकसान हुआ है। इस बीच कोरोना संकट के दौरान ऑनलाइन कंपनियों की पौ बारह हो गई है। कोरोना की दूसरी लहर के बीच तमाम बंदिशों की वजह से जिले के ग्राहकों का रुझान ऑनलाइन खरीदारी की ओर तेजी से बढ़ने लगा है। अब लोग खाने पीने की चीजों, कपड़ा, साड़ी, जूता, मोबाइल, घड़ी, दवाएं सहित इलेक्ट्रानिक, इलेक्ट्रिकल सहित तमाम वस्तुएं ऑनलाइन से मंगाने लगे हैं। सामान मिलने के बाद पैसे चुकाने की सुविधा मिलने के कारण इसका क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। अगर सामान पंसद नहीं आए या कुछ गड़बड़ी हो तो उसे समय सीमा में वापस भी कर सकते हैं। इस संबंध में नगर के निजामुद्दीनपुरा निवासी सरिता देवी, जानकी सिंह का कहना था कि कोरोना संक्रमण काल में दुकानों पर भीड़ रहती है। ऐसे में आनलाइन खरीदारी करना ज्यादा सुरक्षित रहता है। वहीं अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष डॉ. रामगोपाल गुप्ता का कहना है कि लाकडाउन के चलते जिले में लगभग 90 करोड़ का नुकसान हो चुका है। आनलाइन कारोबार बढ़ने से जिले के रिटेलरों का कारोबार पूरी तरह से चौपट हो रहा है। सरकार की तरफ से आनलाइन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाना जाए। इसी तरह उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिला महामंत्री गोपाल कृष्ण बर्नवाल का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन से जिले में लगभग 90 करोड़ का नुकसान हुआ है। लॉकडाउन में लाभ आनलाइन कंपनियां उठा रही हैं। आनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों की चांदी कट रही है। जबकि स्थानीय रिटेलरों की हालत खराब हो रही है। जबकि स्थानीय व्यवसायी ही ज्यादा टैक्स देते हैं। आनलाइन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र सरकार से मांग की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें