रानीपुर थाना क्षेत्र के बरवां गांव के प्रभुशंकर ने अपनी हत्या की आशंका सात महीने पूर्व ही जता दी थी। हत्या के पीछे एक महिला के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ना बताया जा रहा है।
उसी गांव की एक महिला को भू माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज के माध्यम से कागजात में मृत दिखाकर उसकी संपत्ति अपने नाम करा ली थी। इसी महिला का प्रभुशंकर पैरवीकार था। उसने महिला को तो जिंदा करने में सफलता पा ली लेकिन खुद ही दुनिया से रुखसत हो गया।
ज्ञात हाे कि पड़री गांव की ही एक महिला की कोई औलाद नहीं थी। गांव के कुछ लोगों ने उसे कागजात में फर्जी दस्तावेज के सहारे मृत दिखा दिए। इसकी जानकारी जब महिला को हुई तो उसने अपने भाई के साथ ही गांव के प्रभुशंकर चौबे के साथ मिलकर संघर्ष शुरू कर दिया।
इस लड़ाई में महिला की तरफ से प्रभुशंकर भी पैरवीकार था। न्यायालय से महिला को छह माह पूर्व विजय मिल चुकी थी। प्रभुशंकर ने 20 नवंबर 2015 को एसपी को पत्र लिखकर बताया था कि उसकी हत्या की साजिश गांव के ही कुछ लोग रच रहे हैं। प्रभुशंकर ने पत्र में उक्त महिला की जमीन के विवाद काे इसका कारण बताया था। इस प्रकरण में विपक्षियों ने 50 हजार के ईनामी बदमाश आशीष चौबे से भी नजदीकियां बढ़ाई थीं।
हत्यारोपी बनाए गए एक आरोपी का आशीष चौबे के साथ ही संबंध का भी मामला प्रकाश में आया है। हालांकि आशीष चौबे भी इसी गांव का रहने वाला था, लेकिन उसकी नजदीकियां प्रभुशंकर के विपक्षियों से थीं।