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नोटिस के बाद गृह मंत्रालय को भेजा पत्र, लगाया मुख्तार की मदद का आरोप

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ठेकेदार अजय सिंह मन्ना के हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय से बाइज्जत किए जाने पर उनके भाई अशोक सिंह ने हाईकोर्ट में अपील किया। इस दौरान मामला एमपीएमएलए कोर्ट में लंबित है, जिरह बसह होने के बाद कोर्ट मामले में निर्णय सुनाने के लिए लगातार मुख्तार अंसारी को कोर्ट में पेश करने का आदेश जारी की। यही नही मामले को जल्द से जल्द निस्तारित करने का आदेश हाईकोर्ट ने भी जारी किया। लेकिन पंजाब पुलिस मुख्तार को कोर्ट में पेश करने की बजाय उनकी बीमारी का सार्टिफिकेट कोर्ट में प्रस्तुत करती है।
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इस पर अजय सिंह उर्फ मन्ना सिंह के भाई अशोक सिंह ने हाईकोर्ट में पंजाब पुलिस के डीजीपी, एडीजी जेल, के साथ रुपनगर जिले के जेल अधीक्षक पर कोर्ट की अवमानना की रिट दखिल कर नोटिस सर्व कराए। इतना ही नहीं उन्होंने बुधवार को गृहमंत्री भारत सरकार को पत्र भेजा। इसमें पंजाब सरकार के साथ वहां के प्रशासन पर मुख्तार की मदद करने का आरोप लगाया, साथ ही इस मामले में हस्तक्षेप कर मुख्तार की कोर्ट में पेशी कराने की अपील किया है। बताते चले 28 अगस्त 2009 को बदमाशों ने नरई बांधा निवासी ठेकेदार अजय सिंह मन्ना को सरेशाम उनके घर के पास गोलियों से छलनी कर दिया। इस घटना में अजय सिंह उर्फ मन्ना सिंह की मौत हो गई। जबकि उनके मित्र रमेश राय और सफारी का चालक शब्बीर गंभीर रुप से घायल हुए थे। उपचार के दौरान रमेश राय की मौत हो गई। घटना के बाबत मुख्तार अंसारी सहित अन्य कई लोगों के विरुद्घ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बीते 17 सितंबर 2017 को फैसला सुनाया। इसमें मुख्तार सहित आठ लोगों बाइज्जत बरी किया गया। जबकि तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इस फैसले के विरुद्घ अशोक सिंह हाईकोर्ट में अपील किए। मामला एमपीएमएलए कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। जहां सुनवाई के दौरान बहस जिरह हो चुकी है, फैसला करने के लिए कोर्ट मुख्तार की पेशी कराने की नोटिस जारी किया। लेकिन हर बार पंजाब पुलिस उनकी बीमारी की स्लीप पेश कर देती है।
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