किसी लोक सेवक के द्वारा लोक कार्यालय में स्थान ग्रहण करने के समय यह ध्यान देना आवश्यक है कि लोक सेवा का कार्य महज निजी लाभ एवं सुख- सुविधा के लिए नहीं किया जा सकता।
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पदीय दायित्वों के निर्वहन में शुचिता एवं पारदर्शिता का होना अत्यंत आवश्यक है। जिससे सरकारी कार्यालय में लोक सेवक के प्रति जनता का विश्वास सदैव बना रहे। जब लोक सेवक के द्वारा ही कूटरचना और धोखाधड़ी करते हुए गलत तथ्यों के आधार पर कार्य किया जाए, तो ऐसे कार्यालय में रखे हुए दस्तावेजों की शुचिता और सत्यता पर संदेह उत्पन्न हो जाएगा।
ये टिप्पणी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह ने अपने निर्णय में दोषी लेखपाल को तीन साल की सजा सुनाते हुए कही। दोषी लेखपाल ने जीवित व्यक्ति को मृतक बनाकर उसकी संपत्ति दूसरों के नाम करने के मामले में विचाराधीन आरोपी था।