नगर स्थित एक हास्पिटल में सोमवार को विधानपरिषद के सभापति गणेश शंकर प्रजापति के पहुंचने पर भव्य स्वागत हुआ। वह लगभग साढे़ तीन बजे अस्पताल पहुंचे। आधा घंटा रुकने के दौरान उन्होंने अपने पुराने संबंधियों के साथ मुलाकात की। इसके बाद लखनऊ के लिए रवाना हो गए।
इस दौरान कहा कि विधायिका का अपना अलग कार्य है, जो उत्तर प्रदेश सरकार से अलग है। विधानपरिषद में सदस्यों के मुद्दों के संबंध में कहा कि हर क्षेत्रों से पहुंचे सदस्यों की बातें कार्यवाही में शामिल की जाती हैं। इसका कार्य सरकार के किसी कार्य में हस्तक्षेप करना नहीं है।
कहा कि स्नातक सहित कई अन्य पदों के लिए जल्द ही चुनाव होना है। पार्टियां अपने-अपने प्रत्याशियों की घोषणाएं करती हैं। उनका इससे कोई लेना देना नहीं है। यह पूछे जाने पर कि विधान परिषद सदस्य के चुनाव में भी धन बल हावी हो रहा है।
इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है, आज भी लोग विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभा के बल पर भी चुने जा रहे हैं। विभिन्न पार्टियां भी ऐसे लोगों का सम्मान कर रही हैं।
एमएलसी चुने जाने के बाद संबंधित क्षेत्रों में सदस्यों की उदासीनता के सवाल पर कहा कि क्षेत्र लंबा होने के चलते यह संभव नहीं है कि वह विधायक की तरह हर स्थानों पर उपलब्ध हो सकें। संगठन या किसी मुद्दों को लेकर ही विधान परिषद सदस्य अपने लोगों के बीच सक्रिय रह पाते हैं।