मुम्बई से चलकर मऊ के रास्ते देवरिया के पथरदेवा गाँव जाने के दौरान गाजीपुर तिराहा पर रुके एक ही गा?
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मऊ। लाकडाउन में प्रवासी मजदूरों के लगातार अपने घर पलायन का सिलसिला जारी है। सबसे ज्यादा मजदूर गुजरात और महाराष्ट्र से पलायन कर रहे हैं।ऐसे में कई मार्मिक खबरें भी सामनें आ रही है। इन सबके बीच मुंबई से देवरिया को निकले एक ही गांव मजदूरों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि 35सौं रुपया प्रति व्यक्ति देने भी आधे रास्ते में छोड़ दिया। लॉक डाउन के दौरान 9 मई को मुंबई के अंबरनाथ से 7 मजदूर अपने गाँव देवरिया जिले के पथरदेवा के लिए निकले। हाथ में झोला और सिर पर अपना बैग लिए उमेश, बृजेश, रतन, बिट्टू, अनूप, राकेश, अर्जुन मुंबई से गाँव के लिए चले तो करीब 100 किमी चलने के बाद उन्हें रास्ते में एक डीसीएम मिला। जिसने उनसे प्रति व्यक्ति 35 सौ रुपए लिए और जानवरों की तरह उसमें ठूसकर बैठाया और चार दिनों के सफर के बाद 13 मई को उन्हें बनारस के 50 किमी दूर रास्ते में ही उतारकर छोड़ दिया। ये मजदूर 13 मई की सुबह वाराणसी से पैदल ही अपने देवरियां के पथरदेवा गांव जाने को निकले।14 मई की दोपहर वे नगर के गाजीपुर तिराहा पहुँचे जहां से वे पैदल ही अपने गंतव्य को निकले। मजदूरों के साथ चल रहे उमेश ने बताया कि 6 दिनों के सफर में सिर्फ दो दिन खाना खाए। बृजेेश ने कहा कि हमारे साथियों में कोई कारपेंटर, तो कोई मजदूरी का काम करता है।