संस्कृत जानें, संस्कृति को संभालें, इसी को उद्देश्य बनाकर बिहार निवासी आचार्य अरुण कुमार देश भ्रमण पर निकले हैं। वे संस्कृत भाषा को आमजन की भाषा बनाना चाहते हैं। वह 20 घंटे में संस्कृत सिखाने का दावा करते हैं।
बिहार के खबड़ा गांव निवासी आचार्य अरुण कुमार देश भ्रमण के दौरान आज कल जिले में हैं। जिले के सिद्धा में हो रहे यज्ञ में पहुंचकर लोगों को संस्कृत भाषा सीखने के लिए प्रेरित किया।
अरुण अपने शरीर पर पैम्फ्लेट लगाकर लोगों को संस्कृत पढ़ने के लिए जागरूक कर रहे हैं। अरुण जहां भी जाते हैं, उनके परिधान लोगों को अपने तरफ आकर्षित करते हैं। 20 घंटे में संस्कृत सिखा देने का दावा कर रहे अरुण कुमार की मानें तो बिहार के मोतिहारी डीएवी स्कूल में बतौर संस्कृत शिक्षक के पद पर वह तीन वर्ष काम किए। लेकिन संस्कृत के प्रति कुछ अलग करने के जुनून के कारण वर्ष 2013 में नौकरी छोड़ दी।
वर्तमान में जगह-जगह भ्रमण कर संस्कृत भाषा सीखने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। पढ़ाने और प्रचार प्रसार के इस तरीके से उनके परिवार के लोग नाखुश रहते हैं। इसके बावजूद वे अपने मुहिम पर कायम हैं। उनका दावा है कि वे 10 दिनों की पढ़ाई में ही लोगों को संस्कृत सिखा सकते हैं। इस संबंध में आचार्य अरुण कुमार का कहना है कि संस्कृत सिखाने के लिए कोई फीस तय नहीं है।
अभिभावक जो भी दे देते हैं मंजूर कर लेता हूं। व्यक्ति निर्माण के लिए संस्कृत सीखना बेहद आवश्यक है। बताया कि 150 से अधिक लोगों को संस्कृत सिखा चुके हैं। संस्कृत में मूल रूप से 100 शब्द उपयोगी हैं। जिन्हें जानना जरूरी है। दूसरी भाषा के हावी होने के कारण भी हमारी संस्कृत भाषा की स्थिति दयनीय हुई है।
आचार्य अरुण पेंटिंग भी करते हैं। खुद से जागरूकता का स्लोगन पेंटिंग कर लोगों में बांटते हैं। वे कहते हैं कि जागरूकता के अभाव में लोग संस्कृत में रुचि नहीं ले रहे। जरूरी है कि संस्कृत को अच्छे से जानें। अपनी संस्कृति को संभालने की जरूरत है।