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Mau News: पांच वर्ष बाद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन चिह्नित

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मऊ। तमसा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने आखिरकार संज्ञान ले ही लिया। अमर उजाला ने कई बार इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया। नगर से होकर बहने वाली तमसा नदी में नगरीय क्षेत्रों के गिरने वाले नालों के गंदे पानी और सेफ्टी टैंकों के मलबे से शीघ्र ही मुक्ति मिलेगी। जिलाधिकारी के प्रयासों से नगरपालिका परिषद क्षेत्र में अमृत 2.0 कार्यक्रम के तहत सीवर व्यवस्था के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए ग्राम पंचायत बढुआ गोदाम में 2.098 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित कर लिया गया है। परियोजना से तमसा नदी जहां स्वच्छ होगी, वहीं नगर पालिका क्षेत्र के आसपास रहने वाले किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने के साथ ही खाद भी उपलब्धता होगी। इससे नगर पालिका का राजस्व भी बढ़ेगा। शहर का सीवर तमसा नदी में गिरता है। नालों के मुहाने पर बायो रेमिडेशन तकनीक से पानी को फिल्टर करने के बाद नदी में गिराया जाता है। वर्ष 2019 में एनजीटी की टीम ने तमसा नदी के साथ नगर पालिका क्षेत्र का निरीक्षण किया था। इस दौरान नदी के पानी का नमूना लेने के बाद जिला प्रशासन को गाइडलाइन जारी की थी। नगर क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नदी में गिरने से रोकने के लिए कहा था। इसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार कर पानी को साफ करने के बाद ही नदी में गिराने के लिए कहा गया था। एनजीटी के निर्देश पर तत्कालीन डीएम ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने इस कार्य की जिम्मेदारी जल निगम के साथ नगर पालिका को सौंपी थी। उधर, कार्यदायी संस्था जल निगम ने अपने हिस्से का कार्य पूरा कर प्रस्ताव शासन को भेज दिया। लेकिन नगर पालिका की ओर से प्लांट के लिए जमीन चिह्नित नहीं की जा सकी। अब पांच साल बाद जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र के प्रयासों से नगर पालिका परिषद क्षेत्र में अमृत 2.0 कार्यक्रम के अंतर्गत सीवर व्यवस्था के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए ग्राम पंचायत बढुआ गोदाम में 2.098 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित कर लिया गया है। जिलाधिकारी ने योजना को मूर्त रूप देने के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दिया है।
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सियरही वर्जला गांव में जमीन चिह्नित
सरयू नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से नगर पंचायत क्षेत्र दोहरीघाट में एफएसटीपी की स्थापना के लिए घोसी तहसील क्षेत्र के लिए सियरही वर्जला गांव में 1.160 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। इस प्लांट की स्थापना से सेफ्टी टैंकों के मलबे का ट्रीटमेंट कर बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। साथ ही सेफ्टी टैंकों के मलबे को नदी आदि में प्रवाहित करने पर भी रोक लगेगी, जिससे नदियों को प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी।
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