मऊ। जिले में कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को संदिग्धों की जांच में जिले में पांच नए संक्रमित मरीज मिले है। सकारात्मक बात है कि जिले में टीकाकरण का ग्राफ 90 फीसदी से ज्यादा हो चुका है लेकिन बूस्टर डोज के प्रति लोग अभी उदासीन है। जिले में अब तक केवल 33 हजार लोगों को ही कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लग पाई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की बूस्टर डोज को लेकर कार्ययोजना धरातल पर फेल होती नजर आ रही है। इसके पीछे प्रचार-प्रसार की कमी भी सामने आ रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बूस्टर डोज के प्रति लाभार्थी अंजान है। बताते चले कि 60 वर्ष से ज्यादा आयु वर्ग के लोगों को बूस्टर डोज लगवाने के लिए जिला अस्पताल और दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीनेशन की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इससे पूर्व जिले में 25 लाख की आबादी के सापेक्ष 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के 16 लाख 62 हजार के सापेक्ष 17 लाख से अधिक लोगों को टीके की पहली तो 15 लाख से ज्यादा लोगों को टीके की दोनों डोज लगाई जा चुकी है। वर्तमान में 12 से 14 तथा 15 से 17 वर्ष के किशोरों का टीकाकरण किया जा रहा है। जिले में वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके 90 फीसदी लोगों ने बूस्टर (प्रिकॉशन) डोज नहीं लगवाए हैं। अब ऐसे में लोगों को घर-घर ढूंढकर टीके लगाने की तैयारी है। जिले में बढ़ते कोरोना के केस को लेकर स्वास्थ्य विभाग इसकी तैयारी में है। कोरोना संक्रमण से राहत मिलने के बाद अब लोग भी लापरवाह हो गए हैं। यही कारण है कि तीसरी डोज के तौर पर लगाए जा रहे बूस्टर डोज को लेकर लोगों ने गंभीरता नहीं जताई। जिले में 6 लाख से ज्यादा लोगों को सेकंड डोज में 9 माह का समय पूरा हो चुका है, बावजूद इसके जिले भर में अब तक सिर्फ 33 हजार 802 लोगों को ही बूस्टर डोज लगे हैं।