गांव में सफाई के अभाव में जमा गंदगी का अंबार।
एक जमाने में जिले का आदर्श गांव रहा सेमरी जमालपुर आज बदहाल है। कल्पनाथ राय के इस पैतृक गांव में कभी आज से बेहतर स्थिति थी। मऊ से मधुबन के बीच बने शहीद मार्ग पर बसे इस गांव के सामने की सड़क तक नहीं बनाई गई। इससे लोगों का चलना भी दुश्वार है। जबकि एक जमाना वह भी था, जब कल्पनाथ राय जीवित थे। तब इस गांव में यह हाल नहीं था। उनके मरने के बाद आज हालत बदत्तर हो चली हैं। गांव में विकास इस तरह से किया गया था कि युवाओं को अपनी जरूरत के लिए कही दूर न जाना पड़े।
हम बात कर रहे हैं मऊ जिले की नींव डालकर उसे विकास की बुलंदियों पर पहुंचाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. कल्पनाथ राय के पैतृक गांव सेमरी जमालपुर की। जिले के लिए कल्पनाथ राय ने जितना विकास किया, उतना ही अपने गांव के बारे में उन्होंने सोचा था। इसका परिणाम रहा कि पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में डाक बंगला, पोस्टआफिस, इलेक्ट्रानिक दूरसंचार केंद्र, 33/11 विद्युत उपकेंद्र, कोल्ड स्टोरेज सहित अन्य सभी सुविधाएं मौजूद हैं। इसका परिणाम रहा कि एक जमाने में इस गांव की गिनती आदर्श गांवों में की जाती थी।
मऊ से मधुबन जाने वाले शहीद मार्ग पर बसे इस गांव तक जाने वाले सड़क की उस जमाने में यह खासियत थी कि गाड़ी में रखा पानी छलकता नहीं था। लेकिन आज सारी सुविधाएं बदहाल है कोई उनको संजोने वाला नहीं है। हालत यह है कि सड़क के किनारे मौजूद पोस्ट आफिस में नोटबंदी के दौरान एक तो रुपया उपलब्ध नहीं कराया जा सका। यहां पर करीब तीन हजार बचत खाताधारक हैं। मथली आरडी का पांच सौ खाता चलता है, वहीं आरडी के पांच हजार खाते है। टीडी के तहत चार सौ खाता धारक है। इसके बाद भी सुविधाएं नदारद है।