मऊ। प्रदेशभर में वामपंथी दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनसंगठनों से जुड़े लोगों का निजी डेटा जुटाने और कथित तौर पर ‘सर्विलांस स्टेट’ बनाने की प्रशासनिक कोशिशों के विरोध में बृहस्पतिवार को संयुक्त वामपंथी दल ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद वाम नेताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए तत्काल रोकने की मांग की।
ज्ञापन में वामपंथी दलों ने पुलिस प्रशासन और स्थानीय अभिसूचना इकाई पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि विभिन्न थानों और पुलिसकर्मियों द्वारा फोन कॉल, व्हाट्सएप संदेश और विशेष प्रोफार्मा भरवाने के माध्यम से राजनीतिक कार्यकर्ताओं तथा सामाजिक आंदोलनों से जुड़े लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है।
जयप्रकाश धूमकेतु ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं से आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट विवरण, बैंक खातों की जानकारी, पारिवारिक वंशावली, संपत्ति का ब्योरा और व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्रोफाइल से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां मांगी जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जानकारी देने से इनकार करने वाले कार्यकर्ताओं को पुलिसिया कार्रवाई, गिरफ्तारी और अन्य गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं। वक्ताओं ने इस कार्रवाई को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को मिले ‘निजता के मौलिक अधिकार’ का उल्लंघन बताया।
वीरेंद्र कुमार ने कहा कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपराधियों या समाज विरोधी तत्वों की तरह चिन्हित कर उनका ‘डोजियर’ तैयार करना और उनकी निजी जिंदगी में दखल देना राज्य-प्रायोजित तानाशाही का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन में अब्दुल अजीम खां, शैलेंद्र कुमार, शेर मोहम्मद, रामजी सिंह, रामप्रवेश यादव, हरिलाल, प्रसेन, रामनवल, शीला, शिवमूरत, कल्पनाथ, रामशब्द, विद्याधर कुशवाहा आदि रहे।