अंजुमन मासुमिया की ओर से मंगलवार को परंपरागत रूप से दुलदुल और अलम का जुलूस निकाला गया। इस दौरान गली मुहल्ले ‘हाय हुसैन’ की दर्द भरी सदाओं से गूंजते रहे। अजुंमनों ने नौहा मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। इससे पहले हुई मजलिस में उलेमा ने शहादत का बयान किया। जिसे सुनकर अजादार रोते रहे।
जुलूस नगर के सेेल टैक्स रोड इमाम चौक से निकलकर इमाम चौक तक गया। नौहाख्वानी जुलूस में शामिल लोगों ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में कर्बला की लड़ाई से जुड़े घटनाक्रम पर मातमी गीतों के माध्यम से रोशनी डाली। इस अवसर पर शमीम कमाल, वसीम कमाल, मंजर इमाम, असलम, अब्बास, इसराइल आदि शामिल रहे।
घोसी : नगर के बड़ागांव स्थित नासिर हुसैन के आवास से सोमवार की रात अलम का जुलूस निकला। अंजुमन सज्जादिया ने नौहाख्वानी की। जुलूस परंपरागत रास्तों से होता हुआ देर रात रौजे अब्बास अलमदार पर दफन हुआ। जुलूस हुसैनी लश्कर के अलमदार हजरत अब्बास की याद में निकाला गया। इससे पूर्व मजलिस में उलेमा ने कहा कि रोजे आशूरा जब खेमे हुसैनी में नन्हे बच्चों ने प्यास की सदा बुलंद की। तब इमाम ने अब्बास अलमदार को बच्चो के लिए पानी का जिम्मा सौंपा। अब्बास दरिया फोरात पर पहुंचे, जहां पहले से ही यजीदी फौज का कब्जा था। अब्बास अलमदार को देख यजीदी फौज भाग खड़ी हुई।
अब्बास ने घोड़े को दरिया में उतारा। मशक में पानी भरा और रवाना हुए। उमरे साद ने फौज से कहा एक बूंद पानी भी खेमे तक नहीं पहुंचना चाहिए। फौजों ने हमला किया और अब्बास के दोनों हाथ काट दिए। अब्बास ने मशके सकीना को दांतों से पकड़ा ताकि पानी को खेमे तक पहुंचाया जाए। तभी एक जालिम ने तीर मार कर मशक का पानी बह दिया। जबकि एक आैर जालिम ने ऐसा गुर्ज मारा जिससे अब्बास अलमदार घोड़े पर संभल नहीं सके और जमीन पर आ गिरे। भाई हुसैन हो मदद के लिए बुलाया। जिस पर इमाम हुसैन मदद के लिए पहुंचे।
इस अवसर पर हाजी ग़जनफर अब्बास, साजिद हुसैन, इफ्तेखार हुसै,शमीम हैदर, तफहीम हैदर, शाहिद हुसैन, जफ़र अब्बास,ने दर्द भरे नौहे पढ़े। इस अवसर पर असग़र नासरी, अलमदार हुसैन, अकबर अली आदि शामिल रहे।
कोपागंज : शहीदे कर्बला की याद में अलम का जुलूस मंगलवार को निकाला गया। कसबे में जगह-जगह सबील लगाई गईं। अलम का जुलूस शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। जुलुस क़स्बा चौक होते हुए गंज शहीदां पंहुचा।
इस दौरान अंजुमनों ने नौहा मातम किया। जुलुस में सबीउल हसन, जफरुल हसन, समीम मेंहदी, मास्टर जाफर शिया, अली मोहम्मद तक़ी, मौलाना हसन रजा शामिल रहे।