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जांच से खुलेगा फर्जी मनरेगा जाब कार्डधारकों का फर्जीवाड़ा

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मऊ। जनपद में फर्जी जाबकार्ड धारकों की संख्या लाखों में हैं। कार और कोठी वालों के नाम से भी मनरेगा मजदूर जाबकार्ड बना दिए गए हैं। इन फर्जी कार्डधारकों के नाम से रोजगार देने से लेकर भुगतान तक का खेल चलता रहता है। इसमें ऐसे लोगों के नाम भी कार्ड बना दिए गए हैं, जिनकी संख्या गांव में ही नहीं है। शिकायतों को देखते हुए अब शासन ने सभी गांवों में बने जाबकार्डों की पात्रता की जांच कराने का निर्णय लिया है। जिले के नौ ब्लाकों में कुल तीन लाख दस हजार 507 जाबकार्ड धारक मजदूर हैं। दो लाख 12 हजार148 वेरीफाइड हैं। इनमें से एक लाख 32 हजार 714 एक्टिव हैं। इन जाबकार्ड धारकों में बहुत ऐसे हैं जो पात्रता की श्रेणी में नहीं आते हैं। इनके पास कार कोठी, सरकारी नौकरी है। प्रधानों ने अपने चहेते परिवारों के किशोरों ओर किशोरियों तक के नाम से मनरेगा जाबकार्ड बनवा दिए हैं। ऐसे कार्ड धारक कभी काम पर नहीं जाते लेकिन उनके बैंक खाते में मजदूरी की रकम पहुंच जाती है। बहुत से जाबकार्ड धश्रक ऐसे भी जो विदेशों में रह रहे हैं। बहुत से मजदूर दिवंगत हो चुके हैं। लेकिन उन्हें नियमित रूप से रोजगार मिल रहा है और उनके खातों में मजदूरी जा रही है। बहुत से ऐसे मजदूर भी हैं जो शहरों में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं लेकिन प्रधान की कृपा से उनके खातों में मजदूरी जा रही है। ऐसे जाबकार्डधारकों की संख्या भी काफी है जो कभी एक्टिव ही नहीं रहे। ऐसी अनेक शिकायतों को देखते हुए शासन के निर्देश पर अब जांच कराई जा रही हैं। जांच में बड़े बड़े खुलासे हो रहे हैं लेकिन अभी जांच कर्ता कुछ बताने से परहेज कर रहे हैं। डीसी मनरेगा उपेंद्रनाथ पाठक ने बताया कि शासन के निर्देश पर मनरेगा मजदूरों के जाबकार्डों की जांच कराई जा रही है।
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