फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जांच में सीएम आवास के 68 लोग मिले अपात्र

विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ। बड़रावं ब्लाक के सरायसादी गांव में मुख्यमंत्री आवास के आवंटन में भारी गड़बड़ी पाई गई है। आवास के लिए गांव के 73 लोगों के चयन का प्रस्ताव पारित कर गांव सभा की ओर से भेजा गया। शिकायत आने पर एडीओ एसआईबी से इसकी जांच कराई गई। जांच अधिकारी ने पाया कि 73 आवंटियों में से 68 के अपने पक्के मकान हैं और वे मानक के अनुरूप आवास के पात्र नहीं हैं। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट बीडीओ को सौंप दिया। इसके बावजूद बिचौलियों ने जांच रिपोर्ट को चुनौती देते हुए तहसील दिवस में जिलाधिकारी के समक्ष शिकायती पत्र दिया। डीएम ने दोहरीघाट ब्लाक के एडीओ एसआईबी से दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। दोबारा जांच में जांच अधिकारी पर अपात्रों को पात्र की श्रेणी में शामिल करने का दबाव डाला जा रहा है।
विज्ञापन

सरायसादी गांव में कुछ अनियमितताएं मिलने पर त्रिस्तरीय समिति का गठन किया गया था। गांव में मुख्यमंत्री आवास के लिए 73 लाभार्थियों का चयन करके प्रस्ताव भेज दिया गया था। लाभार्थियों की इस सूची का पता जब गांव वालों को चला तो शिकायत की गई कि इस सूची में अधिकांश चयनित अपात्र हैं। इनके पक्के मकान हैं। बीडीओ की ओर से इन शिकायतों की जांच के लिए ब्लाक के एडीओ एसआईबी गिरीश चंद सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया। गिरीश चंद सिंह ने शिकायतों की गहनता से जांच किया तो 73 लोगों में से केवल पांच पात्र मिले जबकि 68 ऐसे मिले जो योजना की गाइड लाइन के तहत पूरी तरह अपात्र थे। इनके पक्के मकान थे।
जांच के दौरान भी जांच अधिकारी पर दबाव बनाया गया कि अपात्रों को भी पात्रता की श्रेणी में डाल दें लेकिन जांच अधिकारी ने दबाव को दरकिनार करके निष्पक्षता से जांच किया और सितंबर 2020 में जांच रिपोर्ट बीडीओ को सौंप दी। इस जांच से गांव के बिचौलियों में हड़कंप मचा है। इसके बाद घोसी में आयोजित पिछले संपूर्ण समाधान दिवस में गांव के 11 लोगों ने प्रार्थना पत्र दिया कि पवत्रों को भी अपात्र घोषित कर दिया गया है। इसलिए फिर से दुबारा जांच होनी चाहिए। जिलाधिकारी ने इस प्रकरण की दोबारा जांच के आदेश दिए। अब दोहरीघाट के एडीओ एसआईबी से जांच कराई जा रही है। गांव के सक्रिय बिचौलिए अब जांच अधिकारी पर दबाव बना रहे हैं कि पहली बार जांच में अपात्र बता दिए गए लोगों को अब की बार पात्रता की श्रेणी में ला दिया जाए। इस बाबत बीडीओ निवेदिता सिंह का कहना है कि जांच बिलकुल निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। किसी का दबाव काम नहीं आएगा। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर उनके दिशा निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें