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Mau News: दस महीने में 20 हजार बच्चे बीमार मिले, 48 के दिल में छेद, पांच हजार के दांत और दो हजार की आंखों में समस्या

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आरबीएसके टीम द्वारा कोपागंज स्थित प्राथमिक विद्यालय में जांच करते हुए
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की 18 टीम ने बीते 10 महीने में 2587 आंगनबाड़ी केंद्र और 1400 सरकारी स्कूलों में तीन लाख से अधिक स्कूली बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई है। इनमें 5 हजार बच्चों में दांतों की बीमारी मिली है।
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किसी में पायरिया, दांतों में सड़न, हिलने व अन्य समस्या मिली है। दो हजार आंख की बीमारी तो 4 हजार से अधिक स्कीन रोग से पीड़ित बच्चें मिले हैं। जांच के दौरान 48 बच्चों में दिल के छेद की बीमारी भी सामने आई, जिसमें तीन का आपरेशन हो चुका है, जबकि 12 खुद से उपचार करा रहे हैं, वहीं 20 प्रतीक्षारत हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग ब्लॉक कोपागंज, रतनपुरा, फतेहपुर मंडाव, बड़राव, घोसी, दोहरीघाट, मुहम्मदाबाद गोहना, परदहा, रानीपुर में दो-दो टीम के हिसाब से 18 टीमें बनाई हुई हैं।
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आरबीएसके कार्यक्रम के प्रभारी अरविंद वर्मा ने बताया कि अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 तक विभाग ने सरकारी स्कूलों में 1 लाख 86 हजार 331 स्कूली छात्र और 2587 आंगनबाड़ी केंद्र में साल में दो बार जांच के लिए 3 लाख 82 हजार 660 बच्चों का जांच का लक्ष्य रखा गया है।
इसमें अब बीते जनवरी तक 1 लाख 26 हजार 885 बच्चों का उपचार किया गया, जबकि आंगनबाड़ी केंद्रों में 2 लाख 20 हजार 78 बच्चों का जांच हो चुका हैं। बताया कि 20 हजार 993 बच्चें अलग अलग बीमारी से ग्रसित मिलें।
इसमें दांतों की समस्या 5 हजार 595 बच्चों में, स्कीन से संबंधित समस्या 4 हजार 428, आंख से जुड़ी समस्या 2 हजार 331 बच्चों में मिली। वहीं कान बहने की समस्या 1837 जबकि विटामिन ए की कमी 1426 बच्चाें में मिली। बताया कि अब तक 19 हजार 786 बच्चों का उपचार किया जा चुका हैं।


तीन गंभीर बच्चों का कराया ऑपरेशन
आरबीएसके टीम के जांच में इस साल 48 बच्चों में दिल की गंभीर बीमारी यानी दिल में छेद की बीमारी भी सामने आई। इसमें आरबीएसके टीम ने तीन गंभीर बच्चों का ऑपरेशन निशुल्क कराया। जबकि जांच के बाद यह रोग सामने आने पर 12 के परिजन खुद इसका उपचार करा रहे हैं। वहीं बीस अन्य बच्चों की सूची निशुल्क योजना के तहत भेजी गई है, इनका भी जल्द ही उपचार होगा। जांच के दौरान किशोरियों में खून की कमी, माहवारी संबंधित समस्याओं के आने के मामले भी आए, जिनका उपचार स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा किया जा रहा है।

पैकेट की चीजें खाने से बढ़ रही दांतों की बीमारी
कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज की डेंटल सर्जन माला द्विवेदी ने बताया कि बच्चों में दांत संबंधित समस्याओं का ग्राफ हर वर्ष बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण भोजन में पौष्टिक आहार न लेना, खाने में पैकेजिंग खाद्य सामग्री की अधिकता होना है। इसके अलावा प्रतिदिन ब्रश न करना, खाने से पहले हाथ साफ न करना के साथ कई बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना कारण है। मुंह संबंधी बीमारियों से बचने के लिए प्रतिदिन सुबह व शाम ब्रश करें। अभिभावक बच्चों को तला हुआ भोजन कम दें, खाने में हरी सब्जियां व मोटे अनाज का प्रयोग करने के साथ विपरित गुण वाले पदार्थों का एक साथ सेवन न करने की कोशिश करें।

स्वास्थ्य की जांच करती है आरबीएसके टीम
स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करने और उपचार कराना है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत बीमार बच्चों की विद्यालयों में तलाश की जाती है। प्रत्येक ब्लॉक पर दो-दो टीम तैनात की गईं हैं।



जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 10 महीने में स्कूलों व आंगनबाड़ी में तीन लाख से अधिक बच्चों की जांच की गई। इनमें 20 हजार बच्चों में से पांच हजार में दांतों संबंधी समस्याएं मिलीं। वहीं चार हजार से अधिक बच्चों में स्कीन से जुड़ी समस्या सामने आई है, इसके अलावा अन्य मिली बीमारियों के सभी बच्चों का उपचार किया जा रहा है। -डॉ. संजय गुप्ता, सीएमओ
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