जिला मुख्यालय स्थित रोडवेज सिर्फ खंडहर बनकर रह गया है। मुख्य भवन से लेकर प्रतीक्षालय, वर्कशाप सब जर्जर हो चुके हैं। हर जगह दुर्व्यवस्था का बोल बाला है। इसके बाद भी बगल के जिले के होने के बावजूद परिवहन मंत्री दुर्गा यादव को यहां की बदहाली दिखाई नहीं दे रही। ऐसे में यहां के लोगों का कहना है कि जरा यहां भी ध्यान दीजिए परिवहन मंत्री जी।
प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री ने अपने गृह जिले आजमगढ़ के रोडवेज परिसर को एयरपोर्ट के तर्ज पर माडल बनाने की घोषणा की। इसके साथ ही प्रदेश के कई जिले के रोडवेज परिसर को माडल बनाने का भी घोषणा की। लेकिन बगल का जिला होने के बावजूद उनका कोई भी ध्यान जिला मुख्यालय स्थित रोडवेज पर नही है।
रोडवेज परिसर की बात करें तो यहां पर बदहाली ही बदहाली है। रोडवेज परिसर उपेक्षा का शिकार है। यहां पर बिल्डिंग से लेकर वर्कशाप और यात्री प्रतिक्षालय सभी जर्जर हो चुके हैं। वहीं पूरे परिसर में सफाई न होने पर गंदगी का अंबार लगा रहता है। यात्री सुविधा के नाम पर बेंच तक नही है कि उसपर कोई यात्री बैठ सके। इतना ही नही रोडवेज परिसर स्थित डीजल पंप का टीन शेड भी जर्जर स्थिति में है।
रोडवेज परिसर में केवल एक स्थान पर यात्रियों के पानी पीने के लिए टोटी लगा हुई है। जिसमें कभी पानी आता है कभी नही आता है। ऐसे में यात्रियों को गर्मी के इस मौसम में पीने के पानी के लिए काफी जद्दोजहद करना पड़ता है।
मऊ रोडवेज से आजमगढ़, बलिया, गोरखपुर, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, जौनपुर आदि स्थानों के लिए बसें जाती है। रेलवे स्टेशन से सटे होने के चलते यहां पर काफी संख्या में सवारियां भी विभिन्न रुटों पर आती जाती है।
जिससे रोडवेज को अच्छी आय भी होती है लेकिन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का थोड़ा भी ध्यान यात्री सुविधाआें और मऊ रोडवेज को अच्छा बनाने पर नही है। ऐसे में यहां के लोगों में खासी निराशा है।