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बंद काटन मिल चालू हो तो जिले के विकास को लगेंगे पंख

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मऊ। आजमगढ़ से जिले से अलग होकर एक अलग जनपद के रूप में 34 वर्ष में जिले में तमाम नए आयाम स्थापित हुए हैं। जिले को करोड़ों के कई प्रोजेक्ट की सौगात मिली है। अब चार घंटे में लखनऊ पहुंचना आसान हो गया है। मेडिकल कालेज खोलने की स्वीकृति मिली है। नगरपालिका का विस्तार होने से विकास गति तेज होगी। नगर क्षेत्र में बंद चल रही काटन मिल खुल जाए तो जिले के विकास को पंख लग सकते हैं। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय के प्रयास से 19 नवंबर 1988 को जीवन राम छात्रावास के प्रांगण में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मऊ जिला बनाने की घोषणा की थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ ने जिले में वाराणसी-भटनी को बड़ी लाइन, दो ओवरब्रिज, राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीव ब्यूरो, नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय सहित तमाम प्रोजेक्ट की स्थापना कराया। लेकिन उनके निधन के बाद विकास गति ठहर सी गई। लेकिन अब एक बार फिर विकास गति को रफ्तार मिलने लगी है। करोड़ों रुपये की लागत से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की सौगात मिली है। अब जिलेवासियों को चार घंटे में लखनऊ की यात्रा करना आसान हो गया है। इसी तरह करोड़ों की लागत से मऊ-गोरखपुर फोरलेन की सौगात मिली है। इसके साथ ही मऊ डिपो वर्कशाप, मऊ रोडवेज का सुंदरीकरण सहित मऊ-शाहगंज रेलमार्ग का विद्युतीकरण, रेलवे स्टेशनों का सुंदरीकरण, इंदारा-दोहरीघाट आमान परिवर्तन, मऊ जंक्शन पर वाशिंगपिट, सहित तमाम प्रोजेक्ट की सौगात मिली है। परदहां की स्पीनिंग और स्वदेशी कॉटन मिल दशकों से बंद पड़ी हैं। बंद मिल चालू हो जाए तो जिले के विकास गति तेज हो सकती है।
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