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मारपीट में दलित की हुई मौत के मामले में तीन को आजीवन कारावास की सजा

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मऊ। विशेष न्यायाधीश एससी/ एसटी एक्ट ललिता गुप्ता ने मारपीट के दौरान 15 वर्ष पूर्व गब्बू सोनकर की हुई मौत के मामले में नामजद 5 आरोपियों में सुनवाई के बाद तीन को दोषी पाया। तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा के साथ ही कुल 18-18 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर 3-3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। आरोपी बबलू के नाबालिग होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। वहीं आरोपी सालता की मौत हो जाने के चलते उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। मामला कोपागंज थाना क्षेत्र के कोडरा गांव का है। अभियोजन के अनुसार कोपागंज थाना क्षेत्र के कोडरा गांव निवासी सुखारी सोनकर पुत्र परसाती की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें गांव के ही मुकेश और बबलू पुत्रगण हरि मल्लाह, करन और चंद्रजीत पुत्रगण बल्ली मल्लाह और सालता पुत्र गोरख मल्लाह को आरोपी बनाया। वादी के अनुसार 4 मई 2007 को उसकी बहू चंद्रकला घर में अकेली थी। उसी दौरान आरोपी ने गाली देते हुए मारा पीटा, जब वादी मुकदमा और उसका लड़का गब्बू सोनकर, पत्नी कुमारी, बहु रीता, सोमारी, भूल्ली व सहोदरी घर पर आए तो अभियुक्तगण उन्हें भी मारेपीटे, जिससे गब्बू सोनकर के पेट में चोट आई। 7 मई 2007 को उसकी मौत हो गई। तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर बाद विवेचना आरोपपत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक सत्येंद्र नाथ राय व अखिलेश कुमार सिंह ने 13 गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण मुकेश, करन और चंद्रजीत को बलवा, मारपीट, गाली गलौज, गैर इरादतन हत्या और एससी/एसटी एक्ट का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद मुकेश, करन और चंद्रजीत को एससी/ एसटी एक्ट के मामले में आजीवन कारावास की सजा के साथ ही 10-10 हजार रुपये अर्थदंड, गैर इरादतन हत्या के मामले में 10-10 वर्ष की सजा के साथ ही 5-5 हजार रुपये अर्थदंड लगया। वहीं बलवा, मारपीट और गाली देने के मामले में क्रमश: एक-एक वर्ष की सजा के साथ ही एक-एक हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया।
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