कचालू नहीं बेचूंगा तो अब्बू डाटेंगे, कचालू बेचने से ही परिवार का खर्च चलता है। मैं रोजाना सुबह हमदरसे के पास पहुुंच जाता हूं। छुट्टी होने तक कचालू बेचने के बाद घर जाता हूं। यह बातें नगर के एक मदरसे के गेट के सामने ठेले पर कचालू बेच रहे छह साल के बच्चे ने मंगलवार को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी डा. विजयप्रताप यादव के स्कूल न जाने के सवाल के जवाब में कही। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मंगलवार को मदरसों की जांच के लिए नगर के डोमनपुरा मुहल्ले के मदरसा फहरान तहजीबुल कुरान पहुंचे थे। वहां छह साल के बच्चे को कचालू बेचते देख हैरत में पड़ गए। छह साल के बच्चे तुफैल को मदरसे के सामने कचालू बेचना सब पढ़ें सब बढ़ें, के सरकार के नारे को मुंह चिढ़ाता नजर आ रहा था। उन्होंने तुफैल के पास जाकर पूछा कि बेटा तुम इस उम्र में स्कूल क्यों नहीं जाते।
तुफैल ने जवाब दिया कि कचालू न बेचकर मदरसे जाऊंगा तो अब्बू डांटेंगे। हम तो पढ़ना चाहते हैं पर अब्बू हमें मदरसे नहीं भेजते। कहते हैं , तू मदरसे जाएगा तो हम खाएंगे क्या। यह सुनने के बाद डॉ. यादव ने मदरसे के टीचर को बुलाया।
उससे पूछा कि मदरसे के सामने कचालू बेचने वाले इस बच्चे को पढ़ने के लिए प्रेरित क्यों नहीं करते। उन्होंनेे मदरसा के टीचर कमाल अख्तर से कहा कि वे तुुफैल के घर जाएं और उसके पिता मो. यासीन से बात करके बच्चे का मदरसे में नाम लिखाएं।। यदि भिभावक न तैयार हों तो हमें सूचित करें। हम खुद उसके अभिभावक से बात करके तुफैल को मदरसे में पढ़ने भेजने के लिए राजी करेंगे।