घोसी नगर के बड़ागांव में नौहाख्वानी करते अकीदतमंद।
- फोटो : mau
नगर के बड़ा गांव स्थित शिया समुदाय ने बुधवार की देर रात इमाम हुसैन के बीसवें पर अलम और ताजिए का जुलूस निकाला। इससे पूर्व हुई मजलिस में उलेमा कहा कि कर्बला की जंग में इमाम हुसैन अपने खानदार के साथ हक और इंसाफ की खातिर शहीद हो गए। जुलूस में रास्तेभर अजादार और अंजुमने नौहा और मातम करते चल रहे थे।
मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना नसीमुल हसन ने कहा कि रसूल के नवासे इमामे हुसैन ने अपने 72 साथियों और परिवार के साथ इस्लाम को बचाने, हक़ और इंसाफ को जिंदा रखने के लिए शहीद हो गए थे। उन्होंने यजीद के आगे झुकने की बजाय शहादत दे देना बेहतर समझा। कहा कि कर्बला की जंग में इमाम हुसैन की शहादत हर धर्म के लोगों के लिए मिसाल है। यह जंग बताती है कि जुल्म के आगे कभी नही झुकना चाहिए। इमाम हुसैन की शहादत का बयान सुनकर मौजूद अजादार रो पड़े।
अंजुमन इस्लामिया धरौली व घोसी की अंजुमनों ने नोहा मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। जुलूस क़दीमी रास्ते सदर बाजार इमाम चौक, धुरसिंग, छोटे फाटक, नीम तले और बड़े फाटक होते देर रात दो बजे इमाम बारगाह पर समाप्त हुआ। इस दौरान मोजाहिर हुसैन, रमजान हुसैन, शमीम, असगर नासरी, नसीम, लुकमान हैदर, अनीस समेत काफी संख्या में अजादारों की मौजूदगी रही।