अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक, अजय कुमार श्रीवास्तव ने दहेज के लिए विवाहिता को प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में पति जितेंद्र यादव, देवर मणिंद्र यादव और सास कांता यादव को दोषी पाया।
दोषी पाए जाने के बाद तीनों को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास के साथ ही 25-25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। वहीं प्रताड़ना के मामले में तीन-तीन वर्ष की सजा और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड दिया गया। मामला दोहरीघाट थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव का है।
अभियोग के अनुसार, कोतवाली घोसी क्षेत्र के पिड़सुई अहिलासपुर गांव निवासी सकलदेव यादव पुत्र स्व. बल्देव यादव की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई थी। वादी का कथन था कि उनकी बेटी मीरा यादव की शादी शाहपुर गांव निवासी जितेंद्र यादव के साथ हुई थी।
आरोप है कि दहेज को लेकर मीरा यादव को उसके पति जितेंद्र यादव, भाई मणिंद्र यादव और सास कांता यादव ने 22 अप्रैल 2008 को जहर देकर मारने का प्रयास किया।
पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय में अभियोजन की ओर से आठ गवाह पेश किए गए और अभियोजन का पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष ने कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी जितेंद्र यादव, कांता यादव और मणिंद्र यादव को प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में दोषी पाया।
दोषी पाए जाने के बाद सभी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में सात-सात वर्ष का सश्रम कारावास और 15-15 हजार रुपये अर्थदंड, वहीं प्रताड़ना के मामले में तीन-तीन वर्ष की सजा और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड दिया गया। अर्थदंड न देने पर 6-6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।