मऊ। जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में वर्षो से शिक्षकों के पद रिक्त होने से शैक्षिक गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में राजकीय विद्यालयों की स्थिति सामने आ गई है। मेरिट सूची में प्राइवेट स्कूलों का ही दबदबा रहा। हालत यह है कि विद्यालयों में 176 के मुकाबले 100 शिक्षकों ही तैनात हैं। जबकि आला अधिकारी शासन स्तर से नियुक्ति होने की प्रक्रिया बताकर मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। जिले में 14 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त चलने से छात्रों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है। यह विद्यालय यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में सरकारी मेरिट सूची में जगह बनाने में दूर रहे। शिक्षकों के रिक्त चल रहे पदों पर नजर डाली जाए तो प्रवक्ता के 40 पद के मुकाबले पांच ही कार्यरत हैं। 120 सहायक अध्यापकों के मुकाबले 66 ही ड्यूटी कर रहे हैं। जबकि 16 प्रधानाचार्य के मुकाबले पांच की ही तैनाती है। शेष प्रभारी प्रधानाचार्योंके भरोसे विद्यालय संचालित हो रहे हैं। राजकीय माध्यमिक विद्यालय सहरोज में विज्ञान, गणित, अंग्रेजी विषय के सहायक अध्यापकों का पद लंबे समय से रिक्त है। ऐसे में नामांकन पर असर पड़ रहा है। यही हाल नगर के इमिलिया स्थित राजकीय बालिका इंटर कालेज का है। यहां भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, प्राणी विज्ञान सहित विभिन्न विषयों के प्रवक्ता का पद रिक्त है। जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं को वैैकल्पिक व्यवस्था के तहत गुणवत्तापरक शिक्षा देने का प्रयास जारी है। विद्यालयों में रिक्त चल रहे विषयों के सहायक अध्यापक तथा प्रवक्ता के तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।