दोहरीघाट पंप कैनाल से संबद्ध लखनी माइनर खरीफ सीजन में किसानों के लिए अनुपयोगी साबित हो रही है। निजी संसाधनों की मदद से किसानों ने धान की नर्सरी तो तैयार कर ली है लेकिन माइनर में पानी नहीं छोड़ा गया है। माइनर में खर पतवार लगा हुआ है। विभागीय अधिकारियों को किसानों ने शिकायती पत्र दिया लेकिन माइनर में पानी नहीं छोड़ा गया। वहीं, किसानों ने सिंचाई मंत्री को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। दोहरीघाट पंप कैनाल से लखनी माइनर से मलेरीकोट,लखनी मुबारकपुर, बैरासी, मिश्रौली, बनई सहित 20 गांवों के 100 एकड़ से अधिक उपजाऊं भूमि की सिंचाई की जाती है। जून महीना बीतने को है लेकिन माइनर में अभी तक पानी हीं छोड़ा जा सका है। इस संबंध में किसान संजय भारद्वाज, सुनील कुमार, अनिल यादव, जयनारायण प्रसद का कहना है कि माइनर हम लोगों के लिए बेकार साबित हो रहा है। माइनर में पानी ही नहीं छोड़ा जाता है। निजी संसाधन से नर्सरी तैयार की गई है। विभागीय लापरवाही से धान की रोपाई कराना काफी महंगा साबित हो रहा है। शिकायत के बाद भी विभागीय अधिकारी आश्वासन देकर मामले को टाल दे रहे हैं। माइनर की सफाई कराकर पानी अविलंब नहीं छोड़ा गया तो किसानों का गुस्सा कभी भी फूट सकता है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मनोज सिंह का कहना है कि माइनरों की सफाई रबी सीजन में कराया जाता है। सहायक अभियंता से रिपोर्ट मांगी गई है।