मऊ। जनपद के 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में से मात्र दो में ही बाल रोग विशेषज्ञ हैं। अन्य आठ सीएचसी बिना बाल रोग विशेषज्ञों के चल रही है। अब सवाल यह है कि बिना डॉक्टरों के ग्रामीण इलाकों के नौनिहालों का उपचार कैसे होगा।
कोपागंज और बड़रांव सीएचसी पर ही बाल रोग विशेषज्ञ हैं। बाकि आठ सीएचसी बिना डॉक्टरों के ही चल रही है। आठों सीएचसी पर एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने से दूर दराज क्षेत्रों में लोगों को बच्चों के उपचार के लिए निजी चिकित्सक और अस्पताल का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं जिला अस्पताल में एक स्थाई के साथ तीन संविदा के चिकित्सक हैं, जो ओपीडी के साथ पीआईसीयू में काम करते हैं। जिला महिला अस्पताल में महिला अस्पताल में चार संविदा और तीन स्थाई बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इनके सहारे ओपीडी के साथ एनआईसीयू वार्ड भी चलता है।
जिले में भीषण गर्मी में अगर सबसे ज्यादा बीमारियों से कोई ग्रसित हो रहा हैं तो वह नवजात से लेकर 10 वर्ष तक के मासूम हैं। स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास का दावा कर रही है। लेकिन महत्वपूर्ण साबित होने वाले बालरोग विशेषज्ञों की तैनाती की समस्या विभाग के इस दावे को खोखला साबित करती दिख रही है। सीएचसी को छोड़ कर जिला अस्पताल, महिला अस्पताल में बच्चों के उपचार को लेकर बेहतर संसाधन के साथ डॉक्टरों की तैनाती है।
वर्तमान में बड़राव, कोपागंज सीएचसी पर बालरोग विशेषज्ञों की तैनाती है। जबकि रतनपुरा, दोहरीघाट, मुहम्मदाबाद गोहना, परदहां, घोसी, रानीपुर, फतेहपुर मंडाव, मझवारा नया सीएचसी में बालरोग चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। जिले में चिकित्सीय सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल सहित दस सीएचसी तथा 40 पीएचसी संचालित है। जिले की 25 लाख की आबादी में साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चों की संख्या है। हर वर्ष 62,500 से अधिक बच्चों का जन्म होता है। लेकिन जिले में बच्चों को बेहतर उपचार नहीं मिल पाता है, वजह है जिले में बालरोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है।
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रेफर होने वाले शिशुओं को सर्वाधिक परेशानी
बाल रोग विशेषज्ञों की कमी के चलते परेशानी नवजात शिशुओं को होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म लेने के दौरान अगर किसी नवजात की हालत गंभीर हो जाती है, तो उसे उपचार समय पर नहीं मिल पाता है। इसके अलावा बालरोग विशेषज्ञों की कमी के चलते बुखार, श्वांस रोग, ब्रेन और इंफेक्शन की समस्या लेकर पहुंचने वाले नवजात बच्चों के उपचार को लेकर होती है।
सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञों की कमी को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है। डॉक्टर के आने के बाद सभी सीएचसी पर तैनाती की जाएगी।
-डॉ. नंद कुमार, सीएमओ