नगर क्षेत्र के नरईबांध स्थित एक अस्पताल के बाहर फेका गया अस्पताल का कचरा।
वैैसे तो अस्पतालों के मामले में मऊ जिला काफी समृद्घिशाली है, लेकिन यहां पर नियमों को ताक पर रखकर नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एकाध नर्सिंग होम को छोड़ किसी के पास वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम नहीं है। ऐसे में अस्पतालों से निकलने वाले घातक मलबे प्रदूषण फैला रहें हैं। जबकि सबकुछ जानकर जिम्मेदार संबंधित विभाग और कर्मचारी अधिकारी मौन साधे हैं।
अस्पतालों से निकलने वाले मलबे से फैलने वाले प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने सभी अस्पतालों को वैस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लगाने का नियम लागू कर रखा है। सीएमओ आफिस में रजिस्टर्ड नर्सिंग होमों को वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लगाने का प्रमाण पत्र मांगा जाता है। जिले में केवल एक नर्सिंग होम में वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। जबकि जिले के अन्य किसी भी अस्पताल में इसका अनुपालन नहीं किया जाता है। लेकिन सभी नर्सिंग होम संचालकों की ओर से क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आजमगढ़ का प्रमाण पत्र संलग्न किया गया है।
बताते चले जिले में सौ से ज्यादा नर्सिंग होम है , लेकिन सीएमओ कार्यालय में मात्र 32 नर्सिंग होम ही रजिस्टर्ड है। लेकिन किसी भी नर्सिंग होम में कचरा निस्तारण यंत्र नहीं लगाया है। अस्पतालों से निकलने वाला कचरा आस पास फेंका जाता है। इससे भारी प्रदूषण फैल रहा। पूर्व में वाराणसी की एक संस्था को सरकारी अस्पतालों से कचरा संकलित करके अन्यत्र लेकर निस्तारित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
लेकिन इसकी निराशाजनक कार्यप्रणाली के कारण संस्था को महानिदेशालय से ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया। इसके बाद दूसरी संस्था को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन वह भी पुरानी संस्था के राह पर चल पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद मूर्ति और गुलाब सिंह का कहना है कि नियुक्त संस्था के वाहन कभी अस्पतालों से कचरा एकत्र करते नहीं देखे जाते। केवल कागजों पर ही खानापूरी कर ली जाती है।