मऊ। जनपद के बड़े सरकारी अस्पतालों में एक रुपये में इलाज मुहैया कराने की शासन की मंशा पर अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदारों की उदासीनता भारी पड़ रही है। इसमें एक अस्पताल महिला जिला अस्पताल भी है, अस्पताल में वर्तमान में चार स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक हैं, बावजूद रोजाना कई मरीज दलालों के झांसे में आकर ठगे जा रहे हैं। अस्पताल में लैब होने के बावजूद ये दलाल मरीजों को निजी लैब में ले जाते हैं। निजी लैब से जुड़े दलालों का अस्पताल के स्टाफ और ऊपर के लोगों से भी साठगांठ है। इनकी पहुंच और हनक ओपीडी से लेकर वार्डों तक दिखती है। इसमें न सिर्फ मरीजों की जेब ढीली हो रही है बल्कि अस्पताल प्रशासन और शासन की साख पर बट्टा भी लग रहा है। जिला महिला अस्पताल में सीएमएस डॉ. चंद्रा सिन्हा स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक हैं, इसके अलावा डॉ. रीमा यादव, डॉ. तोषी सिंह और एक संविदा चिकित्सक डॉ. सबा स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। इसके अलावा तीन महिला मेडिकल ऑफिसर की तैनाती है, वहीं नवीन भवन में संचालित होने के चलते अस्पताल किसी निजी अस्पताल से ज्यादा बेहतर है। बावजूद 100 बेड के इस अस्पताल में हर माह केवल 80 से कम ही सामान्य प्रसव कराया जा रहा है। जबकि सीजर से 4 से 5 प्रसव कराया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि सितंबर में ज्यादा दबाव पड़ने पर पहली बार 9 सीजर कराया गया। वहीं सामान्य प्रसव का ग्राफ 90 तक पहुंचा। जबकि इस सरकारी अस्पताल से कई गुना छोटे अस्पतालों में इससे ज्यादा सामान्य प्रसव कराया जा रहा है। जबकि इस अस्पताल में जिले के नौ सीएचसी से महिला मरीजों को भी रेफर किया जाता है।
कम संख्या में प्रसव होने की सबसे बड़ी वजह है कि अस्पताल में दलालों की सक्रियता और चिकित्सकों की कम उपस्थिति। कई चिकित्सकों द्वारा खुद निजी अस्पताल का संचालन किया जाता है, ऐसे में वो अस्पताल में कम और अपने अस्पताल में ज्यादा समय देते हैं।