मऊ। जिला अस्पताल में आक्सीजन आपूर्ति के लिए हाल ही में पाइप लाइन बिछाकर आटो प्लांट की व्यवस्था की गई, लेकिन लापरवाही और देखरेख के अभाव में एक्युपमेंट बदहाल पड़े हैं। किसी का रेग्युलेटर टूटा पड़ा है, तो किसी का नाब ही गायब है। हालांकि अस्पताल में स्थापित आटो प्लांट से वार्डों में लगे बेडों तक आक्सीजन की आपूर्ति के लिए केंद्रीयकृत व्यवस्था की गई है।
जिला अस्पताल में दस बेड का इमरजेंसी वार्ड है। इसके अतिरिक्त इनडोर में भूतल पर दस वार्ड तथा इतने ही वार्ड प्रथम तल पर हैं। सभी वार्डों में प्रत्येक में छह-छह बेड लगाए गए हैं। इन सभी वार्डों में सभी बिस्तरों तक पाइप लाइन के जरिए आक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था पांच साल पहले कर दी गई थी। लेकिन एक स्थान पर बड़े-बड़े सिलेंडरों में आक्सीजन स्टोर कर उसे लगाया जाता था। इनका आक्सीजन समाप्त हो जाने पर महीनों तक कोई व्यवस्था नहीं हो पाती थी, इसका खामियाजा मरीजों और आकस्मिक मरीजों को भुगतना होता था। ऐसे में डाक्टर व्यवस्था के अभाव में मरीजों को रेफर कर देते थे। लेकिन दो महीने पहले अस्पताल में आक्सीजन आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था की गई है। इनडोर में ही भूतल पर एक आटो प्लांट की स्थापना की गई है। जनरेटर युक्त इस प्लांट से जरूरत के मुताबिक आक्सीजन प्राप्त किया जाता है। सुरक्षा की दृष्टि से जगह-जगह वाल्व लगाया गया है, ताकि गैस लीकेज न हो। लेकिन वार्डो में लगे एक्युपमेंट देखरेख के अभाव में बदहाल है। किसी का रेग्युलेटर टूटा
बोले सीएमएस
जिला अस्पताल में लगे आक्सीजन प्लांट और व्याप्त दुर्व्यवस्था के बारे में बात करने पर सीएमएस डा.बृज कुमार ने बताया कि समय-समय पर पाइप लाइन बिछाने वाली संस्था के लोग आकर इसका निरीक्षण करते रहते हैं। जो भी टूटफूट होगी उसकी मरम्मत संबंधित अधिकृत कंपनी करेंगी। बोले आटो प्लांट लगने के बाद से कभी भी आक्सीजन की कमी नहीं हुई। बोले सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए वाल्वों के बक्से की चाभी ड्यूटी पर आने वाली नर्सों के पास रहता है। जरूरत पड़ने पर वो बाक्स खोलकर वाल्व को स्टार्ट कर देती हैं।