जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में बीते कई माह में हार्मोन से जुड़ी समस्याओं को लेकर पहुंचने वाली मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसमें 20 फीसदी से अधिक मरीज 20 साल से कम उम्र की हैं।
जो बीमारियां या शारीरिक समस्याएं पहले महिलाओं में 30 या 35 वर्ष की उम्र के बाद देखी जाती थीं, वे अब मात्र 20 वर्ष की युवतियों को भी अपना शिकार बना रही हैं।
जिला महिला अस्पताल की डॉक्टर स्वाती गुप्ता ने बताया कि आज के बदलते दौर में स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां भी अपना स्वरूप बदल रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी ओपीडी में रोजाना तीन से चार ऐसी मरीज पहुंच रही हैं, जिनकी उम्र 20 से 25 वर्ष है।
इनके शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन मरीजों में अनियमित मासिक धर्म चक्र, मोटापा और पीसीओएस जैसी समस्याएं कम उम्र में ही दिखाई देने लगी हैं।
वहीं, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रा सिन्हा ने बताया कि हार्मोनल असंतुलन के पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि हमारी बदली हुई कई आदतों का हाथ है। इसमें गलत खानपान और नींद की कमी प्रमुख हैं।
अनहेल्दी और असंतुलित खान-पान हमारे आंतरिक तंत्र को असंतुलित कर रहा है। साथ ही नींद की कमी का भी इसमें अहम योगदान है। इसके अलावा बढ़ता स्क्रीन टाइम भी एक कारण है।
घंटों मोबाइल और लैपटॉप के सामने बिताने से शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हैं। साथ ही करियर और अन्य दबावों के कारण बढ़ता तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ रहा है, जिससे ओव्यूलेशन की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ता है।