मऊ। नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में सोमवार को 1231 स्थानों पर कड़ी सुरक्षा के बीच परंपरागत तरीके से होलिका दहन किया गया। आग लगाते ही होलिका धधक उठी। इससे पूर्व लोगों ने विधिवत होलिका का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान जिला प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। जबकि चौराहों और गली नुक्कड़ों पर हुड़दंगियों की टोली हुड़दंग में मस्त रही।
जिले में 35 अति संवेदनशील और 132 संवेदनशील सहित 1231 स्थानों पर परंपरागत तरीके से हालिका दहन किया गया। होलिका दहन देर तक चलता रहा। बच्चों से लेकर युवा, बुजुर्ग और महिलाएं होली की मस्ती में दिखे। देर रात तक लोग हालिका दहन में मशगूल रहे। इसी तरह ग्रामीण इलाकों मेें भी होलिका दहन परंपरागत रूप से हुआ। लोगों ने होलिका की पूजा अर्चना कर उसमें आग लगाई गई और होलिका जल उठी। इसके पूर्व नगर के सहादतपुरा, रौजा, चौक, मिर्जाहादीपुरा, गोला बाजार, औरंगाबाद, घास बाजार, भीटी सहित घोसी, मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना, दोहरीघाट, चिरैयाकोट सहित विभिन्न बाजारों में सुबह से चहल पहल रही। त्योहारों को लेकर पूरा बाजार गुलजार नजर आया। लोगों ने कपड़ों, रंगो और खाने पीने के तमाम सामान की खरीदारी की। पूरे दिन शहर, कस्बों, बाजारों सहित सभी चट्टी चौराहों पर खासी चहल पहल देखी गई। सामान के दामों में बढ़ोतरी के बावजूद खरीदारों की संख्या में कमी नहीं रही। रंग, अबीर गुलाल भी काफी महंगा था। इनमें सुगंध युक्त गुलाल के खरीदार ज्यादा दिखे। हालांकि लोगों ने पैकेट बंद अबीर गुलालों की खरीदारी को अधिक महत्व दिया। उधर, घरों में महिलाएं तरह-तरह के मिष्ठान, पकवान, नमकीन, गुझिया और पापड़ आदि बनाने में जुटी रहीं। बच्चे सुबह से ही गुब्बारों में पानी और रंग भरकर आते-जाते लोगों पर फेंकते रहे।
घोसी कोतवाली क्षेत्र में सबसे अधिक अतिसंवेदनशील होलिका स्थल
मऊ। जिले में घोसी कोतवाली क्षेत्र में सबसे अधिक अतिसंवेदनशील होलिका स्थलों की संख्या 15 है, जबकि संवेदनशील होलिका की संख्या 67 है। सबसे ज्यादा घोसी के 205 स्थानों पर होलिका दहन हुआ। मधुबन थाना क्षेत्र में एक अति संवेदनशील, चार संवेदनशील सहित 179 स्थानों पर होलिका दहन हुआ। मुहम्मदाबादगोहना कोतवाली क्षेत्र में तीन अतिसंवेदनशील, छह संवेदनशील सहित 175 स्थानों पर होलिका दहन हुआ।