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जर्जर अस्पताल भवनों में बंट रही हैं सेहत की खुराक

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नगर के ढेकुलियाघाट स्थित जर्जर पड़ा ईएसआई अस्पताल।संवाद - फोटो : MAU
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मऊ। मानसून सीजन में अब एक माह से भी कम समय रह गया है। बावजूद इसके जिले में कई सरकारी अस्पताल जो बेहद जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं उन्हें न तो उनको कंडम घोषित किया गया न ही उनकी मरम्मत को लेकर कोई कवायद हो रही है। ऐसे में ड्यूटी करने वाले चिकित्सक तथा स्वास्थ्यकर्मी किसी भी अनहोनी को लेकर दहशत में हैं। वहीं मरीज भी अस्पताल के जर्जर भवनों में जाने से कतराते हैं। सब कुछ जानने के बावजूद संबंधित जिम्मेदार उदासीन बने हैं। ढेकुलिया घाट पर ऐलोपैथ विधा में संचालित ईएसआई अस्पताल है। हालात यह है कि दशकों से यह अस्पताल एक किराए के भवन में संचालित हो रहा है। जर्जर भवन में संचालित अस्पताल की हालात यह है कि छत से लेकर दीवार तक सब क्षतिग्रस्त हालात में पहुंच गई है। यहां प्रतिदिन 50 से ज्यादा मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। चिकित्सक तथा स्वास्थ्यकर्मी डर के साए में ड्यूटी करते हैं। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि कई बार इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन बीते कई सालों से केवल आश्वासन मिल रहा हैं। बारिश में जर्जर भवन में काम करने के दौरान अनहोनी को लेकर डर बना रहता है। यहीं स्थिति रानीपुर ब्लाक के खुरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की है। वर्ष 1985 में बना चार बेड वाला खुरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मरम्मत के अभाव के कारण आज जर्जर हाल में पहुंच गया है और ढहने की कगार पर है। हल्की सी भी बारिश हो जाए तो हर जगह से पानी टपकता है। हालात यह है कि अस्पताल का आकस्मिक कक्ष, लैब तथा वार्ड आदि ढह गए हैं। जबकि अस्पताल पर प्रतिदिन अमारी, खुरहट, हाजीपुर, कसारी, धर्मसिपुर, एकडंगा, भौरेपुर, सोनिसा,रामपुर बखरिया, चक्रदेवा आदि गांवों के 25 -25 मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए आते हैं। समस्या के संबंध में रानीपुर सीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी दिनेश कुमार का कहना है की अस्पताल के जर्जर भवन के संबंध में विभागीय उच्चाधिकारियो को पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. एसएन दुबे का कहना है कि इसकी जानकारी नहीं है, इस मामले को दिखवाता हूं।

नगर के ढेकुलियाघाट स्थित जर्जर पड़ा ईएसआई अस्पताल।संवाद- फोटो : MAU

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