मौसम वैज्ञानिकों के द्वारा अच्छी बारिश की भविष्यवाणी से उत्साहित किसानों के माथे पर अब चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं। अगेती धान की नर्सरी रोपाई के लिए तैयार है, लेकिन मौसम दगा दे रहा है। नहर तथा माइनरें भी शोपीस बनी हैं। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि नहरों तथा माइनरों को पूरी क्षमता से नहीं चलाया जा रहा है। हालत यह है कि मुख्य नहर में कम पानी छोड़े जाने से माइनरों में मुख्य नहर से टेल तक पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है।
जिले में 87 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की खेती की जाती है। लगातार दो वर्ष से सूखा पड़ने से किसानों की कमर ही टूट गई है। इस वर्ष मौसम वैज्ञानिकों द्वारा अच्छी बारिश की भविष्यवाणी के बाद किसानों ने जून में ही नर्सरी डाल दी। नर्सरी तैयार हो गई है। लेकिन मौसम की बेरुखी से किसानों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी हैं। हालत यह है कि अब तक 200 हेक्टेयर में ही रोपाई हो पाई है। जिला कृषि अधिकारी वीके सिंह का कहना था कि अभी नहरी क्षेत्रों में रोपाई हो रही है। दो से तीन दिन में अच्छी बारिश होने की संभावना है। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किसानों के लिए नहर तथा माइनरें अनुपयोगी साबित हो रही है।
सिंचाई के लिए जिले में करोड़ों की लागत से बनी तीन नहरें है। तीनों नहरों की 70 माइनरें हैं। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल दोहरीघाट से मऊ और बलिया मिलाकर लगभग 22 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाने की क्षमता है।
किसानों के अनुसार पीक सीजन में नहर को पूरी क्षमता से न चलाए जाने से माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। इससे सभी किसानों को लाभ ही नहीं मिल पा रहा। हालत यह है कि मधुबन क्षेत्र के बशऊडीह माइनर, नत्थूपुर माइनर, कटघरा महलू, पहाड़ीपुर, चचाईपार, कुशाडीह सहित विभिन्न माइनरों में पानी ही नहीं पहुंचा है। इसी तरह शारदा सहायक खंड 32 मुख्य नहर बैशाखी के सहारे है। दोहरीघाट पंप कैनाल से ही पानी छोड़ा जाता है। अधिकारियों की मानें तो सेमरीजमालपुर विद्युत उपकेंद्र में आए फाल्ट के चलते एक दिन विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी। इसके चलते पंप बंद हो गया था। खुरहट पंप कैनाल भी खेतों का पेट नहीं भर पा रहा है।
मुख्य नहर तथा माइनरों में पानी छोडने की यही स्थिति रही तो धान की रोपाई समय से हो पाएगी मुश्किल ही लग रहा है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार का कहना है कि सेमरी जमालपुर विद्युत उपकेंद्र में फाल्ट आने के चलते पंप बंद हो गया था। पंप चल रहा है। एक दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी।