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घाघरा में उफान आने से मधुबन क्षेत्र के आधा दर्जन गांव टापू की शक्ल में तब्दील

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मऊ के दोहरीघाट में उफनाई घाघरा नदी। - फोटो : MAU
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दोहरीघाट/दुबारी। मधुबन क्षेत्र के हाहानाला रेगुलेटर पर रविवार को नदी का जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहने से लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। घाघरा में उफान आने से आधा दर्जन गांव टापू की शक्ल में तब्दील हो गए हैं। संपर्क मार्गो पर पानी भर जाने से लोगों को अपनी आवश्यकताएं पूरी करने के लिए पानी से होकर आना जाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों की समस्याओं के मद्देनजर मधुबन तहसील प्रशासन की तरफ से घाघरा के विभिन्न तटों पर पांच नावें लगाई गई हैं। वहीं दोहरीघाट के गौरीशंकर घाट स्थित गेज प्वाइंट पर रविवार को नदी की जलस्तर स्थिर रहने से लोगों ने राहत की सांस ली है। नदी की लहरें भारतमाता की दीवारों से टकराने से लोग दहशतजदा हैं।
दोहरीघाट में घाघरा का जलस्तर 24 घंटे में स्थिर रहा। इससे एक तरफ जहां लोगों ने राहत की सांस ली है। वही खतरा अभी टला नहीं है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो घाघरा का जलस्तर शनिवार को 69.95 मीटर रहा। जबकि रविवार को भी घाघरा का जलस्तर 69.95 मीटर पर स्थिर रहा। गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु 69.95मीटर है। नदी खतरा बिंदु से ऊपर पांच सेेमी बह रही है। नदी के उग्र रुप धारण करने से लोग दहशत में जी रहे हैं। लोगों का कहना था कि नदी का जलस्तर स्थिर होने के बाद कभी भी उफान आ सकता है। जिससे बाढ़ की आशंका बनी हुई है।
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मधुबन तहसील क्षेत्र के हाहानाला गेज प्वाइंट पर नदी के जलस्तर में 24 घंटे में चार सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। घाघरा में उफान से आधा दर्जन गांव टापू की शक्ल में तब्दील हो गए हैं। कई गांव के संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। लोगों को अपनी आवश्यकताएं पूरी करने के लिए जान जोखिम में डालकर पानी से होकर आना जाना पड़ रहा है। मधुबन तहसील क्षेत्र का उत्तरी हिस्सा प्रत्येक वर्ष बाढ़ की चपेट में आता है। चक्की मुसाडोही, परसिया भटोली, चौहानपुर, बरोहा, भगत का पुरा, हरिलाल का पुरा, मनमन का पुरा, खैरा, बिंटोलिया, नयी बस्ती, जरलहवा आदि बाढ़ के पानी से घिर गया है।
डूब सकती हैं 25 गांवों की सैकड़ों एकड़ फसल
मधुबन। घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से नदी का पानी खेतों में घुसने लगा है। जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहा तो मधुबन तहसील क्षेत्र के धरमपुर, विशुनपुर, बिंदटोलिया, खैरा, बैरकंटा,भगत का पुरा, मनमन का पुरा, हरिलाल का पुरा, धर्मपुर, टाड़ी, संभारू का पुरा, मोलनापुर, गजियापुर, कुंवरपुरवा, और चक्कीमूसाडोही, सिसवां, बखरिया, नूरूल्लाहपुर, कचिला, नरायनपुर, कलखन्ना तथा सुग्गीचौरी सहित सहित 25 गांवों की सैकड़ों एकड़ धान, गन्ना, बाजरा सहित तमाम फसलें जलमग्न हो सकती है।
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