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Mau News: बिजली निगम के निजीकरण का फैसला वापस ले सरकार

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मऊ। श्रमिक संगठनों के राष्ट्रीय आम हड़ताल के आह्वान पर जिला श्रमिक समन्वय समिति के नेतृत्व में बैंक, बीमा, बिजली कर्मचारी, श्रमिक, किसान, नौजवान-छात्र संगठनों ने गाजीपुर तिराहे से जिला मुख्यालय तक विरोध मार्च किया। साथ ही प्रधानमंत्री को संबोधित 14 सूत्री मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा। वहीं सरकार से बिजली के निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की।
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इस मौके पर पूर्व विधायक इम्तियाज अहमद ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद से पारित चार श्रम संहिताएं (लेबर कोड) मजदूर वर्ग के ऐतिहासिक संघर्षों और अकूत बलिदानों से हासिल अधिकारों पर हमला हैं। यह कोड मजदूर-विरोधी और कारपोरेट मालिकों के हित में हैं। सरकार इन्हें टुकड़ों में लागू कर रही है। ये चारों श्रम संहिताएं वापस ली जाए। उत्तर प्रदेश सरकार कक्षा एक से आठ तक के हजारों सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों का विलय कर रही है। छात्रों की कम संख्या होने को आधार बता कर इसे मर्जर व पेयरिंग का नाम दिया गया है। सरकार का यह फैसला गरीब व शिक्षा-विरोधी है। मनरेगा को मजबूती दी जाए और उसमें मजदूरी दर व रोजगार के दिन बढ़ाएं जाएं। अकुशल श्रमिकों को न्यूनतम 783 रुपया दैनिक मजदूरी दी जाए। मनरेगा की तर्ज पर शहरी बेरोजगारों के लिए भी कानून बने।
स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और न्यूनतम वेतन 21 हजार देने सहित उनकी लंबित मांगें पूरी की जाएं। निर्माण मजदूरों और गरीबों को पांच हजार रुपया मासिक पेंशन दी जाए। सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण और प्राकृतिक संसाधनों को कारपोरेट को सौंपने पर रोक लगाई जाए। कर्मचारी नेता सूर्यदेव पांडेय ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार बिजली का निजीकरण कर रही है। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों को निजी हाथों में सौंपने का काम हो रहा है। निजीकरण से बिजली महंगी होगी, कर्मियों की सेवा व आरक्षण प्रभावित होगा और फायदा निजी कंपनियों को होगा। उत्तर प्रदेश सरकार बिजली के निजीकरण का फैसला वापस ले।
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अंत में प्रदर्शन सभा को सूर्य देव पांडेय, रामऔतार सिंह, वीरेंद्र कुमार, शिवकांत मिश्रा, शिव मूरत गुप्ता, रामजी सिंह, अजीम खां, अनुभव दास, रामसोच यादव, अनीस अहमद, बाबूराम पाल आदि ने संबोधित किया।
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