मऊ। संक्रमण की दूूसरी लहर की इस विषम परिस्थिति में भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उपचार मिल सके। इसके लिए शासन ने कोरोना काल में जिले के सभी नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 38 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आपातकालीन सेवा चालू रखने के निर्देश दिया हैं। लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में बने पीएचसी के जिम्मेदार शासन के इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं।
आलम यह है कि स्वास्थ्य कर्मी अपने केंद्रों पर पहुंच ही नहीं रहे है। बुधवार को घोसी ब्लॉक के अमिला तथा दोहरीघाट ब्लाक के गोठा पीएचसी के लाइव कवरेज में केंद्रों के जिम्मेदारों की मानमानी उजागर हुई। दोनों केंद्रों पर चिकित्सकों की कुर्सियां खाली थी। इलाज कराने पहुंचे कुछ ग्रामीण चिकित्सक के न होने पर वापस लौट गए।
कुुसुम्हा संवाददाता के अनुसार अमर उजाला की टीम बुधवार की सुबह 9.30 बजे गोठा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची। टीम को यहां तैनात चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार के कक्ष पर ताला लटका मिला। वहीं फार्मासिस्ट दीनानाथ, बार्ड ब्याय चंद्रपकाश राय भी अनपुस्थित मिले। मौके पर केवल स्वीपर हमीद मौजूद मिले। बताते चले कि गोठा पंचायत की आबादी 32 हजार के करीब है। यह दोहरीघाट ब्लाक का सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। लेकिन यहां पीएचसी पर डॉक्टर तथा स्वास्थ्यकर्मियों के न बैठने से गांव के लोगों को गंभीर समस्या होने पर तीन किमी दूर दोहरीघाट सीएचसी जाने को मजबूर हैं।
अमिला संवाददाता के अनुसार अमर उजाला की टीम घोसी तहसील के अमिला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुबह दस बजे पहुंची। टीम को यहां तैनात चिकित्सक डॉ. संजय वर्मा गायब मिले। वहीं एएनएम सविता यादव तथा एनएमएस सूर्यभान मौजूद मिले। उधर एक घंटे से चिकित्सक का इंतजार करने के बाद कस्बा में दूसरे निजी चिकित्सक के यहां इलाज कराने की बात कह कर चले गए। इसको लेकर स्थानीय निवासी सावित्री, अशोक, कमलेेश तथा जगदीश का कहना है कि यहां चिकित्सक का अनुपस्थित रहनाआम बात है। अक्सर चिकित्सक तथा दूसरे स्वास्थ्य कर्मी नदारद रहते है।